सुल्तानपुर
जिला अस्पताल की सच्चाई, बाहर की जांच और दवाई
सरकार चाहे जो कहे और व्यवस्था सुधारने की जितनी भी कसरत करे, यहां के जिम्मेदार उसे रत्तीभर व्यवस्थित नहीं होने की जिद पाले बैठे हैं। यह सच शनिवार को जिलाधिकारी ने भी जिला अस्पताल में अपनी आंखों से देखा और कानों से सुना भी। सरकार कहती है जांच अस्पताल में होगी, दवा भी मुफ्त मिलेगी। मगर, तीमारदार डीएम से खुद बता रही थीं कि निजी पैथालॉजी से जांच कराई गई और महंगी दवाइयां भी बाहर से ही मंगाने को कहा गया। अब असल और झूठ में शायद कोई अंतर न रहा। इस बातचीत को कैमरे ने देखा और रिकार्ड भी किया। यही हकीकत हर दिन की है। डेंगू डरा रहा है, चिकनगुनिया फैल रहा है। वायरल का तो मानो मौसम ही आया हुआ है। मरीज पर मरीज अस्पताल में लदे जा रहे हैं। पर इलाज के नाम पर कुछ नहीं और कमाई की हर राह जिम्मेदार तलाशे बैठे हैं। शनिवार को जिला अस्पताल की आंखों देखी कुछ यूं बयां है..।
शनिवार को पूर्वाह्न जिला अस्पताल में मरीजों की भीड़ लगी हुई थी। आपातकालीन कक्ष से लेकर ओपीडी तक में सबसे अधिक संख्या बुखार से पीड़ित लोगों की थी। कूरेभार के डीह ढग्गूपुर निवासी चंदा सिंह कई दिनों से तेज बुखार से पीड़ित हैं। उनकी बेटी पूर्णिमा सिंह ने उन्हें शु्क्रवार को जिला अस्पताल लेकर आईं। उन्होंने बताया कि डॉ. इंद्रसेन गौतम ने अमन पैथॉलाजी से खून की जांच कराने को कहा। जिस पर उन्होंने 250 रुपये देकर जांच कराई। इतना ही नहीं चिकित्सक ने दवाएं भी ऐसी लिखी जो बाहर के मेडिकल स्टोर पर ही मिलती हैं। जब वे दवा खरीदने गईं तो मेडिकल स्टोर संचालक ने 340 रुपये का बिल थमा दिया। पैसों की कमी के चलते उन्होंने सिर्फ सौ रुपये की ही दवा खरीदी। महिला मेडिकल वार्ड में भर्ती सैदपुर निवासी प्रभावती देवी सांस की बीमारी से पीड़ित हैं। उनके बेटे चंदन ने बताया कि अस्पताल में नेबुलाइजेशन की सुविधा न होने के चलते निजी अस्पताल का सहारा लेना पड़ रहा है। डेंगू वार्ड में भर्ती जयसिंहपुर के बसाइतपुर निवासी विनोद मिश्रा ने बताया कि खून की जांच बाहर से करानी पड़ रही ह ।
जिला अस्पताल की सच्चाई, बाहर की जांच और दवाई
सरकार चाहे जो कहे और व्यवस्था सुधारने की जितनी भी कसरत करे, यहां के जिम्मेदार उसे रत्तीभर व्यवस्थित नहीं होने की जिद पाले बैठे हैं। यह सच शनिवार को जिलाधिकारी ने भी जिला अस्पताल में अपनी आंखों से देखा और कानों से सुना भी। सरकार कहती है जांच अस्पताल में होगी, दवा भी मुफ्त मिलेगी। मगर, तीमारदार डीएम से खुद बता रही थीं कि निजी पैथालॉजी से जांच कराई गई और महंगी दवाइयां भी बाहर से ही मंगाने को कहा गया। अब असल और झूठ में शायद कोई अंतर न रहा। इस बातचीत को कैमरे ने देखा और रिकार्ड भी किया। यही हकीकत हर दिन की है। डेंगू डरा रहा है, चिकनगुनिया फैल रहा है। वायरल का तो मानो मौसम ही आया हुआ है। मरीज पर मरीज अस्पताल में लदे जा रहे हैं। पर इलाज के नाम पर कुछ नहीं और कमाई की हर राह जिम्मेदार तलाशे बैठे हैं। शनिवार को जिला अस्पताल की आंखों देखी कुछ यूं बयां है..।
शनिवार को पूर्वाह्न जिला अस्पताल में मरीजों की भीड़ लगी हुई थी। आपातकालीन कक्ष से लेकर ओपीडी तक में सबसे अधिक संख्या बुखार से पीड़ित लोगों की थी। कूरेभार के डीह ढग्गूपुर निवासी चंदा सिंह कई दिनों से तेज बुखार से पीड़ित हैं। उनकी बेटी पूर्णिमा सिंह ने उन्हें शु्क्रवार को जिला अस्पताल लेकर आईं। उन्होंने बताया कि डॉ. इंद्रसेन गौतम ने अमन पैथॉलाजी से खून की जांच कराने को कहा। जिस पर उन्होंने 250 रुपये देकर जांच कराई। इतना ही नहीं चिकित्सक ने दवाएं भी ऐसी लिखी जो बाहर के मेडिकल स्टोर पर ही मिलती हैं। जब वे दवा खरीदने गईं तो मेडिकल स्टोर संचालक ने 340 रुपये का बिल थमा दिया। पैसों की कमी के चलते उन्होंने सिर्फ सौ रुपये की ही दवा खरीदी। महिला मेडिकल वार्ड में भर्ती सैदपुर निवासी प्रभावती देवी सांस की बीमारी से पीड़ित हैं। उनके बेटे चंदन ने बताया कि अस्पताल में नेबुलाइजेशन की सुविधा न होने के चलते निजी अस्पताल का सहारा लेना पड़ रहा है। डेंगू वार्ड में भर्ती जयसिंहपुर के बसाइतपुर निवासी विनोद मिश्रा ने बताया कि खून की जांच बाहर से करानी पड़ रही ह ।

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