[7/27, 5:14 PM]
शिक्षा विभाग पर भारी पड़ रहा प्राइमरी पाठशाला का प्रधानाध्यापक
बढ़ौली नोनियान सरकारी स्कूल के बच्चों सहित अभिभावक परेशान
शिक्षा समिति का गठन करके बाहरी व्यक्ति को बनाया गया अध्यक्ष
सिकरारा, जौनपुर (सं.) 27 जुलाई। जनपद के सिकरारा क्षेत्र के प्राइमरी पाठशाला बढ़ौली नोनियान के प्रधानाध्यापक लगातार सुर्खियों में बनते चले जा रहे हैं। उनके द्वारा की जा रही एक से बढ़कर एक कारस्तानी से जहां अभिभावकों में रोष व्याप्त है, वहीं शिकायत करने के बावजूद भी विभागीय अधिकारी मूकदर्शक बने हुये हैं जो समझ से परे है।
विद्यालय में खाना बनाने वाली महिलाओं से प्रार्थना करवाने वाले प्रधानाध्यापक शिवशंकर यादव के बारे में तमाम की चर्चाएं हैं। उनके मनमानेपन से जहां विद्यालय का पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है, वहीं अभिभावकों में भारी आक्रोश व्याप्त है जो कभी भी विस्फोटक हो सकता है।
उनकी मनमानी का एक उदाहरण गत दिवस तब देखने को मिला जब शिक्षा समिति के गठन पर एकत्रित अभिभावकों को वापस भेजकर विद्यालय का समय समाप्त होने के बाद शिक्षकों को बुलाकर अपने ढंग से समिति का गठन किया गया। एबीआरसी अशोक राजभर की मौजूदगी में गठित समिति के अध्यक्ष के बारे में क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि उनका कोई भी बच्चा उक्त विद्यालय में नहीं पढ़ता है जबकि नियम है कि समिति का अध्यक्ष वही हो सकता है जिसके बच्चे उक्त विद्यालय में पढ़ते हों।
हद तो तब हो गयी जब इसकी शिकायत मौखिक रूप से खण्ड शिक्षा अधिकारी सिकरारा से की गयी तो उन्होंने कोई कार्यवाही नहीं किया। कुल मिलाकर यह कहा जा रहा है कि उक्त प्रधानाध्यापक शिक्षा विभाग पर भारी पड़ रहा है।
तभी तो कई बार लिखित एवं मौखिक शिकायत करने के बावजूद भी प्रधानाध्यापक शिवशंकर यादव के खिलाफ कोई विभागीय कार्यवाही अभी तक देखने व सुनने को नहीं मिली।
[7/27, 5:22 PM] : मायावती को सबसे बड़ा झटका, ये दो बड़े नेता बसपा छोड़ बीजेपी में हुए शामिल
Puri Dunia27 Jul. 11:42
नोएडा। चुनाव से पहले ही यूपी में चल रहा बवाल खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। सारी पार्टियां अपनी पूरी ताकत लगा रही हैं यूपी जीतने के लिए। लेकिन मायावती की बसपा को लगातार झटके मिल रहे हैं। पहले कई नेताओं ने बसपा को अलविदा कह दिया था जिसके बाद अब खबर है कि यूपी के बसपा के दो दिग्गज नेताओं ने बहनजी का हाथ छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया है। जिससे पार्टी को तगड़ा झटका लगा है। आने वाले समय में कुछ और नेता पार्टी का दामन छोड़ सकते हैं।
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मायावती को उनके ही विधायकों ने दिया झटका
बसपा सुप्रीमो मायावती को उनके ही दो विधायकों ने तगड़ा झटका देते हुए पार्टी का अलविदा कह दिया है। ताज्जुब की बात तो ये है कि इन दोनों ने भाजपा को ज्वाइन करते हुए ये भी जता दिया है कि अब वो जीतने वाले कमल के साथ हैं। हारे और थके हुए हाथी के साथ नहीं। मेरठ जिले के लोकेश प्रजापति विधान परिषद के सदस्य रह चुके हैं। साथ ही पार्टी ने उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा भी दिया था। वहीं सिवालखासास से विधायक रह चुके और पार्टी के सीनियर लीडर विनोद हरित ने भी पार्टी का दामन छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया है। वहीं वेस्ट के एक और नेता अरुण कुमार सागर ने भी पार्टी छोड़ भाजपा ज्वाइन की है।
इससे पहले मौर्या ने छोड़ा था मायावती का साथ
इससे पहले स्वामी प्रसाद मौर्या ने बसपा सुप्रीमों मायावती पर गंभीर आरोप लगाते हुए बहुजन समाजवादी पार्टी का साथ छोड़ दिया था। मौर्या ने मायावती पर अंबेडकर के सपनों और विधानसभा में टिकट बेचने का आरोप लगाया था। मौर्या ने कहा था कि मायावती ने अम्बेडकर के सपनों को बेचा है। मौर्या ने तीखे स्वर में कहा था कि मायावती सिर्फ लोगों को दिखाने के लिए अम्बेडकर जयंती मनाती हैं। वह दलितों की जरा भी सुध नहीं ले रही हैं। ��
शिक्षा विभाग पर भारी पड़ रहा प्राइमरी पाठशाला का प्रधानाध्यापक
बढ़ौली नोनियान सरकारी स्कूल के बच्चों सहित अभिभावक परेशान
शिक्षा समिति का गठन करके बाहरी व्यक्ति को बनाया गया अध्यक्ष
सिकरारा, जौनपुर (सं.) 27 जुलाई। जनपद के सिकरारा क्षेत्र के प्राइमरी पाठशाला बढ़ौली नोनियान के प्रधानाध्यापक लगातार सुर्खियों में बनते चले जा रहे हैं। उनके द्वारा की जा रही एक से बढ़कर एक कारस्तानी से जहां अभिभावकों में रोष व्याप्त है, वहीं शिकायत करने के बावजूद भी विभागीय अधिकारी मूकदर्शक बने हुये हैं जो समझ से परे है।
विद्यालय में खाना बनाने वाली महिलाओं से प्रार्थना करवाने वाले प्रधानाध्यापक शिवशंकर यादव के बारे में तमाम की चर्चाएं हैं। उनके मनमानेपन से जहां विद्यालय का पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है, वहीं अभिभावकों में भारी आक्रोश व्याप्त है जो कभी भी विस्फोटक हो सकता है।
उनकी मनमानी का एक उदाहरण गत दिवस तब देखने को मिला जब शिक्षा समिति के गठन पर एकत्रित अभिभावकों को वापस भेजकर विद्यालय का समय समाप्त होने के बाद शिक्षकों को बुलाकर अपने ढंग से समिति का गठन किया गया। एबीआरसी अशोक राजभर की मौजूदगी में गठित समिति के अध्यक्ष के बारे में क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि उनका कोई भी बच्चा उक्त विद्यालय में नहीं पढ़ता है जबकि नियम है कि समिति का अध्यक्ष वही हो सकता है जिसके बच्चे उक्त विद्यालय में पढ़ते हों।
हद तो तब हो गयी जब इसकी शिकायत मौखिक रूप से खण्ड शिक्षा अधिकारी सिकरारा से की गयी तो उन्होंने कोई कार्यवाही नहीं किया। कुल मिलाकर यह कहा जा रहा है कि उक्त प्रधानाध्यापक शिक्षा विभाग पर भारी पड़ रहा है।
तभी तो कई बार लिखित एवं मौखिक शिकायत करने के बावजूद भी प्रधानाध्यापक शिवशंकर यादव के खिलाफ कोई विभागीय कार्यवाही अभी तक देखने व सुनने को नहीं मिली।
[7/27, 5:22 PM] : मायावती को सबसे बड़ा झटका, ये दो बड़े नेता बसपा छोड़ बीजेपी में हुए शामिल
Puri Dunia27 Jul. 11:42
नोएडा। चुनाव से पहले ही यूपी में चल रहा बवाल खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। सारी पार्टियां अपनी पूरी ताकत लगा रही हैं यूपी जीतने के लिए। लेकिन मायावती की बसपा को लगातार झटके मिल रहे हैं। पहले कई नेताओं ने बसपा को अलविदा कह दिया था जिसके बाद अब खबर है कि यूपी के बसपा के दो दिग्गज नेताओं ने बहनजी का हाथ छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया है। जिससे पार्टी को तगड़ा झटका लगा है। आने वाले समय में कुछ और नेता पार्टी का दामन छोड़ सकते हैं।
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मायावती को उनके ही विधायकों ने दिया झटका
बसपा सुप्रीमो मायावती को उनके ही दो विधायकों ने तगड़ा झटका देते हुए पार्टी का अलविदा कह दिया है। ताज्जुब की बात तो ये है कि इन दोनों ने भाजपा को ज्वाइन करते हुए ये भी जता दिया है कि अब वो जीतने वाले कमल के साथ हैं। हारे और थके हुए हाथी के साथ नहीं। मेरठ जिले के लोकेश प्रजापति विधान परिषद के सदस्य रह चुके हैं। साथ ही पार्टी ने उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा भी दिया था। वहीं सिवालखासास से विधायक रह चुके और पार्टी के सीनियर लीडर विनोद हरित ने भी पार्टी का दामन छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया है। वहीं वेस्ट के एक और नेता अरुण कुमार सागर ने भी पार्टी छोड़ भाजपा ज्वाइन की है।
इससे पहले मौर्या ने छोड़ा था मायावती का साथ
इससे पहले स्वामी प्रसाद मौर्या ने बसपा सुप्रीमों मायावती पर गंभीर आरोप लगाते हुए बहुजन समाजवादी पार्टी का साथ छोड़ दिया था। मौर्या ने मायावती पर अंबेडकर के सपनों और विधानसभा में टिकट बेचने का आरोप लगाया था। मौर्या ने कहा था कि मायावती ने अम्बेडकर के सपनों को बेचा है। मौर्या ने तीखे स्वर में कहा था कि मायावती सिर्फ लोगों को दिखाने के लिए अम्बेडकर जयंती मनाती हैं। वह दलितों की जरा भी सुध नहीं ले रही हैं। ��
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