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बुधवार, 17 अगस्त 2016

पंकज मिश्र कानपुर

बांध रही हूँ राखी मैं भैया, पर एक वचन देना होगा;
नहीं कभी भी बेटी से जीवन में घृणा करना होगा;
बाप बनोगे कल तुम लेकिन बेटी को भी अपनाओगे,
करके जांच गर्भ में उसकी हत्या नहीं कराओगे;
मां, बुआ, चाची, भाभी सब किसी-न-किसी की बेटी हैं;
यह जो तेरी बहना है, यह भी तो पापा की बेटी है;
बेटी अगर नहीं होगी तो बहू कहाँ से लाओगे?
अपने बेटे के हाथों में राखी किससे बँधवाओगे?!!!!!

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