प्रतापगढ़ ---------
बीस घंटे बाद मिले दो युवकों के शव
रानीगंज क्रिकेट खेलने के बहाने घर से निकले छह में से तीन युवक सिपाही गांव के पास, कोपा घाट पर बकुलाही नदी में स्नान करने के दौरान डूब गए थे। डूबने के लगभग 20 घंटे बाद दो के शव को ग्रामीणों ने खोजकर नदी से बाहर निकाला। तीसरे युवक का देर शाम तक पता नहीं चल सका।
रानीगंज थाना क्षेत्र के रैनी सतखरिया गांव निवासी आशीष सरोज पुत्र स्व. जग नारायण, सोनू पुत्र राम बहादुर सरोज, पवन उर्फ दीपक पुत्र अमलेश सरोज गांव के ही साथी कुलदीप, रंजन, लालचन्द्र सरोज के साथ क्रिकेट खेलने के बहाने घर से साइकिल से निकले और कोतवाली क्षेत्र के सिपाह महेरी के बकुलाही नदी के कोपा घाट पर जा पहुंचे। स्नान करने के लिए नदी में पहले आशीष कूदा जब वह डूबने लगा तो दीपक व सोनू भी नदी में कूद पड़े। वह भी डूबने लगे तो लालचन्द्र कुलदीप भी उन्हें बचाने के लिए कूद पड़े, लेकिन आशीष, सोनू, पवन कुमार उर्फ दीपक गहरे पानी में फंस कर डूब गए। वहीं रंजन ने चतुराई से नदी में बाजरे की डंडी का उखाड़कर फेंका तो उसी के सहारे कुलदीप को निकाला। उसके बाद लालचन्द्र को भी निकाला। जिससे लालचन्द्र, कुलदीप तो बच गए, लेकिन आशीष, सोनू, दीपक की डूबकर मौत हो गई थी। पुलिस ने गोताखोरों को बुलाया तो इलाहाबाद से निरंजन निषाद, ¨पटू निषाद, अजुर्न, नवीन, अनिल सहित 8 गोताखोर आए शाम होने के कारण सोमवार को नदी में नहीं घुसे। मंगलवार को सुबह करीब 7 बजे ग्रामीणों ने सिपाहमहेरी कोपा घाट के पास नदी में उतराए दीपक और सोनू का शव बाहर निकाल लिया। जबकि देर शाम तक आशीष का शव नहीं मिल सका था। गोताखोर उसे मंगलवार की शाम को खोजना बंद कर दिए। पुलिस ने दीपक व सोनू को शव का पंचानामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पोस्टमार्टम के बाद शव घर पहुंचा तो कोहराम मच गया। गांव में ही दोनों के शव को दफना दिया गया। उधर आशीष के परिजनों का रो रोकर बुरा हाल था।
-बुझ गया दो घरों का चिराग
रानीगंज, प्रतापगढ़ : नदी में स्नान के दौरान डूबकर हुई आशीष और सोनू की मौत से दो घरों का चिराग बुझ गया। मृतक सोनू व उसकी बहन ज्योति दोनों एक साथ एमडीपीजी में बीएससी प्रथम वर्ष के छात्र थे। सोनू की मौत से मां रेखा देवी व पिता राम बहादुर बेहोश पड़े थे। वैसे सोनू के पिता राष्ट्रीय लोकदल युवा अध्यक्ष प्रतापगढ़ के पद पर है। जबकि आशीष सरोज भी तीन बहनों में अकेला था। बड़ी बहन अर्चना की शादी हो चुकी है। कंचन और रंजना के हाथ पीले होने बाकी है। कंचन कक्षा 10 में तो रंजना 8 में पढ़ती है। आशीष के पिता की मौत करीब 15 वर्ष पहले हो चुकी है। मां निर्मला गांव के ही प्राथमिक विद्यालय में रसोइयां का काम करती है। ऐसे में घर का खर्च निर्मला के ही ऊपर है। आशीष की मौत से निर्मला का सहारा छीन गया।
मुंबई से गांव खींच लाई मौत
रानीगंज, प्रतापगढ़ : कहते हैं मौत जब आती है तो अपना बहाना खोज लेती है। कुछ ऐसा ही आशीष सरोज के साथ हुआ। वह 16 अक्टूबर को मुंबई से घर आया था और अपने 6 साथियों के साथ स्नान करने गया तो नदी में समा गया।
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-मुझे तो मेरा लाल चाहिए
रानीगंज, प्रतापगढ़ : आशीष सरोज का मां निर्मला देवी व दीपक की मां उर्मिला, सोनू की मां रेखा देवी तो दहाड़े मारकर बेहोश पड़ी थी। जब भी वह उठती थी तो बस यहीं कहती नजर आती थी। मुझे मेरा लाल चाहिए। मेरे लाल के पास ले चलो। वहीं सोनू की बहन जयोती, अशीष की कहन कंचन, रंजना, दीपक का छोटा भाई सौरभ व बहन संध्या भी भाई की मौत पर दहाड़े मार बेहोश पडे़ थे और यह कहते नजर आए कि किसके हाथ में राखी बांधूंगी।
-----रंजन की सूझ-बूझ से बची तो जाने
रानीगंज, प्रतापगढ़ : नदी में स्नान करने उतरे पांच साथियों को डूबता देख रंजन ने चतुरता दिखाई और पास के खेत से बजरी का लक्ठा उखाड़कर नदी में फेंका। जिसके सहारे डूबे रहे कुलदीप व लालचन्द्र बाहर आ सके। इसी बीच तीन साथी नदी में डूबकर लापता हो गए थे। रंजन ने शोर मचाया तो ग्रामीण दौड़ पड़े लेकिन तक तीन गहरे पानी में समा चुके थे। घटना का प्रत्यक्ष गवाह रंजन वह मजर याद कर रो पड़ता है। वह तो यही कहता नजर आ रहा कि भाइयों को बचा नहीं सका। वहीं लालचन्द्र व कुलदीप भी सदमे में हैं। घटना को यादकर फफक पड़ रहे हैं। दोनों यह कहते नजर आए कि मेरी जान रंजन ने बचा ली।
----------मौके पर डटी रही पुलिस
रानीगंज, प्रतापगढ़ : घटना की सूचना पर पिरथीगंज चौकी इंचार्ज संजय कुमार पाण्डेय जहां टीम के साथ मौजूद रहे। वहीं प्रतापगढ़ कोतवाली पुलिस भी मौजूद रही। चौकी इंचार्ज पिरथीगंज गोताखोरों के साथ दिनभर डटे र
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