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बुधवार, 19 अक्टूबर 2016

तीखी आवाज़

करवा चौथ व्रत है विशेष फलदायी

महिलाओं के लिए सबसे बड़े त्योहार के रूप में माना जाने वाला करवाचौथ पर्व जहां एक ओर धार्मिक श्रद्धा और विश्वास का परिचायक है। वहीं त्योहार से पूर्व पूजा-व्रत सामग्री के अलावा साड़ियों, चूड़ियों और श्रृंगार सामग्री की भी खरीद-बिक्री बढ़ जाती है। सबसे ज्यादा उमंग तो पहला व्रत रख रही नई नवेली दुल्हनों का होता है। पर्व की तैयारी एक माह पूर्व से शुरू हो जाती है।

सुहागिन स्त्रियों के अचल सुहाग का रक्षक करवा चौथ का पर्व इस बार विशेष फलदायी है। ज्योतिषाचार्य शैलेष मोदनवाल व पं.टीपी त्रिपाठी का कहना है कि यह पर्व इस साल कुछ खास महासंयोग को लेकर आया है। आज होने वाला पर्व कार्तिक मास के रोहिणी नक्षत्र से संयुक्त है। इस दिन चंद्रमा अपने नक्षत्र रोहिणी में रहेंगे तथा इस दिन बुध अपनी कन्या राशि में रहेंगे। इसी दिन गणेश चतुर्थी और कृष्ण जी का रोहिणी नक्षत्र भी है। जबकि बुधवार गणेश जी और कृष्ण जी दोनों देवों का दिन है। यह अछ्वुत संयोग करवाचौथ के व्रत को और भी शुभफलदायी बना रहा है। ऐसे सुखद महासंयोग में करवा चौथ के व्रत पूजन से पति की लंबी उम्र की प्राप्ति व संतान सुख प्राप्ति का योग भी बनता है। इसके साथ और भी अभीष्ट कामनाओं की प्राप्ति भी संभव है। व्रत के पौराणिक महत्व के बारे में पं. मुरारी श्याम पांडेय का कहना है कि जब पांडव वन-वन भटक रहे थे तो भगवान श्रीकृष्ण ने द्रौपदी को इस दिव्य व्रत के बारे में बताया था और इसी व्रत का अनुसरण करने पर द्रौपदी ने अपने सुहाग की लंबी उम्र का वरदान पाया था। उन्होंने बताया कि करवाचौथ के दिन श्री गणेश, मां गौरी और चंद्रमा की पूजा की जाती है। चंद्रमा के पूजन से महिलाओं को पति की लंबी उम्र और दांपत्य सुख का वरदान मिलता है। विधि-विधान से यह पर्व मनाने से महिलाओं का सौंदर्य भी बढ़ता है।

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