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सोमवार, 14 नवंबर 2016

रामसेवक विश्वकर्मा

प्रतापगढ़

प्यारी बहनिया, कैसे बनेगी दुल्हनिया

मेरी प्यारी बहनिया बनेगी दुल्हनिया, सजके आएंगे दूल्हे राजा, भइया राजा बजाएगा बाजा..

यह तो रहा फिल्मी गीत, पर नकदी के इस संकट में सवाल यह है कि बहनिया कैसे बनेगी दुल्हनिया। इस बात की चिंता में भाई बेचैन हैं। लालगंज कस्बे के किशोर विपिन कुमार रजक के पिता रामलखन की बीते दो वर्ष पूर्व गंभीर बीमारी के चलते मौत हो गई थी। उस समय विपिन की उम्र लगभग पंद्रह वर्ष थी। उसकी मां श्यामकली जहां विधवा हो चली थी, वहीं इकलौता पुत्र विपिन के सिर पर मां के साथ तीन बहनों की जिम्मेदारी आ पड़ी। वह इसे निभाने के लिए लोगों के कपड़ों की धुलाई करने लगा। इसी बीच उसने अपनी बहन ममता रजक की शादी पनिगो खनवारी संग्रामगढ़ के एक युवक के साथ तय कर दी। धीरे-धीरे तैयारी करने लगा। साथियों से मदद करने की गुहार लगाई। लोगों ने उसका सहयोग करने का आश्वासन दिया। इस बीच जब वह मदद करने वाले लोगों से मिला तो लोगों ने उसे एक हजार व पांच सौ की नोट पकड़ाए। वह नोटों को थामकर जब रविवार को बाजार गया तो कोई भी पुरानी बड़ी नोट लेने को तैयार न था। ऐसे में विपिन के आंखों से आंसू छलकने लगे। वह मायूस हो उठा कि आखिर वह गरीबी के चलते बिन पैसे बहन की डोली कैसे उठाएगा और शादी में खर्च करने के लिए पैसे कहां से आएंगे। इस चिंता में विपिन व उसके घर वाले परेशान हैं।

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