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मंगलवार, 8 नवंबर 2016

तीखी आवाज़

*💥दिल्ली की तुलना 1952 के लंदन के 'ग्रेट स्मॉग' से, 4000 लोगों की हुई थी मौत*
(IST)

नई दिल्ली (जेएनएन)। देश की राष्ट्रीय राजधानी में दमघोंटू स्मॉग ने साल 1952 के लंदन के कुख्यात 'ग्रेट स्मॉग' की याद दिला दी है। पिछले करीब एक हफ्ते से दिल्ली में छाई धुंध और धुएं की घनी चादर से हवा की गुणवत्ता रविवार को इस मौसम के सबसे खराब स्तर पर पहुंच गई।

प्रदूषण के चलते विकराल स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले 24 घंटे में रही हवा की औसत गुणवत्ता के अब अधिकतम सीमा पार करने की भी आशंका भी जताई गई है।

*हवा में प्रदूषण 17 गुना अधिक*

विशेषत्रों की मानें तो सांसों के जरिये फेफड़े में दाखिल होने वाले प्रदूषक कण पीएम 2.5 और पीएम 10 का स्तर कई स्थानों पर सुरक्षित सीमा से 17 गुना ज्यादा रहा।

वहीं, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और 'सफर' की ओर से संचालित निगरानी स्टेशनों का हर घंटा वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 500 से ज्यादा रहा जो अधिकतम सीमा से कहीं ज्यादा है।

*... तो इस तरह हुई लंदन के कुख्यात 'ग्रेट स्मॉग' से तुलना*

कहा जा रहा है कि प्रदूषक कणों की मात्रा जैसे अन्य मानकों के मामले में सल्फर डाइऑक्साइड (एसओ2) का स्तर शहर में अब भी नियंत्रण में है। वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि हालात कुछ वैसे ही हैं जैसे लंदन में 1952 के 'ग्रेट स्मॉग' के दौरान थे। 'ग्रेट स्मॉग' के दौरान करीब 4,000 लोगों की असामयिक मौत हो गई थी।

सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वॉयरमेंट की अनुमित्रा रायचौधरी का कहना है कि 1952 में लंदन में पसरे धुंध और धुएं से तब करीब 4,000 लोगों की असामयिक मौत हो गई थी जब एसओ2 का स्तर काफी ऊंचा होने के साथ-साथ औसत पीएम स्तर करीब 500 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुंच गया था।

यहां एसओ2 का संकेंद्रण उतना ज्यादा भले ही नहीं है, लेकिन जैसा कि हमने दिवाली पर देखा, कई गैसों में अच्छी-खासी बढ़ोत्तरी हुई है। कुल मिलाकर यह एक जहरीली मिलावट है। अनुमित्रा की मानें तो हालात ऐसे ही रहे तो दिल्ली में भी असामयिक मौतें हो सकती हैं।

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