Blog

रविवार, 4 दिसंबर 2016

तीखी आवाज़

"एक लाख शिक्षकों की नौकरी खतरे में

सूबे के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत करीब डेढ़ लाख शिक्षामित्रों की नौकरी पर ही संकट नहीं है, लगभग एक लाख सहायक अध्यापकों की नियुक्ति पर भी तलवार लटकी है। 15 वां संशोधन रद्द होने के बाद प्रदेश सरकार द्वारा की गई सहायक अध्यापकों की लगभग एक लाख नियुक्तियों को लेकर याचिकाएं सुप्रीमकोर्ट में लंबित हैं। सवाल है कि टीईटी प्राप्तांक के बजाए शैक्षणिक गुणांक के आधार पर नियुक्ति करना उचित है या नहीं। प्रदेश सरकार ने 15 वां संशोधन रद्द होने के बाद भी 16 वां संशोधन लाकर शैक्षणिक गुणांक पर ही नियुक्तियां की हैं।
हाल ही में विक्रमादित्य सहित दर्जनों याचिकाओं को इसी मुद्दे पर सुनने के बाद हाईकोर्ट ने प्रकरण सुप्रीम कोर्ट को रिफर कर दिया। सुप्रीमकोर्ट में भी इन्हीं प्रश्नों पर सुनवाई हो रही है। अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना है कि अदालत का फैसला यदि शैक्षणिक गुणांक के पक्ष में आता है तो ठीक वरना 16 वें संशोधन के आधार पर चयनित करीब एक लाख (99132) सहायक अध्यापकों के लिए मुश्किल हो सकती है।
12 वां संशोधन भी रद्द हो चुका है

सुप्रीम कोर्ट को प्रकरण रिफर करते हुए चीफ जस्टिस डीबी भोसले और जस्टिस यशवंत वर्मा की पीठ ने माना है कि 15 वां संशोधन रद्द होने के बाद 16 वें संशोधन का औचित्य नहीं रह जाता है क्योंकि 16 वें संशोधन में आधार 15 वें संशोधन का ही लिया गया है। मगर खास बात है कि 12 वां संशोधन भी रद्द हो चुका है क्योंकि राज्य सरकार ने ही इसे समाप्त करते हुए 15 वां संशोधन किया था। 12 वें संशोधन में टीईटी मेरिट को चयन का आधार बनाने की बात थी। विवाद यहीं से उत्पन्न हुआ।
अधिवक्ता विनय कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि खंडपीठ ने टीईटी का वेटेज अनिवार्य माना है। एनसीटीई द्वारा जारी 11 अगस्त 2011 की अधिसूचना के पैरा 9(बी) को भी खंडपीठ ने विधि मान्य

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

have any doutes. please let me