जौनपुर (एनएसएन)। अक्टूबर में जब पारसनाथ घर आया था तो परिवार के साथ उसकी अंतिम मुलाकात थी यह कोई नहीं जानता था। जाते-जाते उसने यह कहा कि था जल्द ही छुट्टी लेकर घर बनवाने वापस आऊंगा लेकिन शहीद का यह सपना अधूरा ही रह गया। यह कहकर पिता फफककर रो पड़े। माँ बेसुध पड़ी थी तो पत्नी रो-रोकर बेहोश जा रही थी। वहीं बच्चें घर में रोना-पीटना देखकर गुमसुम उदास थे। भाई का भी बुरा हाल है। बावजूद इसके परिवार को अपने लाल के शहीद होने पर फक्र है।
कहते है वीर सपूतों की वीरता कम नहीं होती दुश्मन चाहे कितना ही सितम न ढा लें। सुबह मार्च के दौरान हुए बम बलास्ट में जौनपुर का एक लाल शहीद हो गया। सिकरारा क्षेत्र के दुदौली निवासी पारसनाथ सरोज (35) पुत्र तेरस नाथ सरोज सुकमा छत्तीसगढ़ में अल्फा 219 सीआपीएफ में हेड कांस्टेबल के पद पर 2014 बैच के पोस्टेड थे। शनिवार दोपहर 12 बजे जवानों के साथ मार्च कर रहे थे कि एक बम पैर के नीचे पड़ गया। शहीद के पैतृक गांव दुदौली थाना सिकरारा में लोगों की आंखें नम हो गयी। पिता तेरसनाथ सरोज, माता इनर देई व पत्नी प्रीति किरन सरोज, बच्चे शिवांगी, किट्टू व भाई पप्पू का रो-रोकर बुरा हाल है। पिता तेरसनाथ का कहना हैं कि बेटा अक्टूबर में आया था। घर बनाने की इच्छा से छुट्टी लेकर आने वाले थे। मन की बात मन में रह गयी कहकर फफककर रो पड़े। समाचार लिखने जाने तक शहीद का पार्थिव शरीर पैतृक गांव नहीं पहुंच सका है।
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