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बुधवार, 11 जनवरी 2017

रामसेवक विश्वकर्मा

प्रतापगढ़

परिजनों के सपने टूटे, घर-गांव में मातम

विश्वनाथगंज जम्मू में हुए आतंकी हमले के शिकार बेल्हा के युवक गहरे दोस्त थे । साथ ही घर भी छोड़ा। हमले में तीन दोस्तों में से दो की मौत हो गई और तीसरा जीवन मौत से जूझ रहा है। अचानक युवकों की मौत से परिजन अवाक रह गए। एक झटके में उनके सपने चकनाचूर हो गए हैं तो गांव में मातम का माहौल है।

मांधाता के रहने वाले मुजीबुल रहमान मुंबई में ट्रक चलाते हैं। इनका सबसे बड़ा बेटा सलमान पढ़ लिख कर परिवार की हालत सुधारने के लिए कमाने की तैयारी करने लगा। यही समस्या उसके दोस्त इरशाद और अब्दुल अजीज की भी थी। तीनों दोस्तों ने तय किया कि अब अपने पैरों पर खड़े होकर परिवार का बोझ कम किया जाए। यह सोच कर तीनों पूना में आयोजित सेना भर्ती में गए, लेकिन सफल नहीं हुए। इसके बाद इनके एक रिश्तेदार रकीब खान के माध्यम के जम्मू पहुंचे और वहां सेना के ग्रेफ यूनिट में संविदा पर काम करने लगे।

ग्रेफ शिविर पर आतंकियों ने रविवार की रात हमला कर दिया, जिसमें सलमान और इरशाद की मौत हो गई, जबकि अजीज घायल हो गया। इस बात की खबर जब उनके घर आई तो परिजन बदहवास हो गए। सलमान की मां रफीकुल निशा अचेत हो गई। उसके अन्य भाई इरफान, आदिल व अफान भी रोने लगे। उधर, इरशाद के घर उसके भाई शहबाद खान और सुकरान खान समेत तीन बहनें अवाक रह गईं। अजीज के घर के लोग भी परेशान हो उठे। अजीज के पिता दिल्ली में प्राइवेट काम करते हैं। सलमान का घर जहां मांधाता खास में है, वहीं इरशाद का बहरापुर व शिवरा में है।

तीनों गांव अगल-बगल होने से युवकों में शुरू से ही दोस्ती चली आ रही थी। तीनों में से किसी की शादी अभी नहीं हुई थी। उनकी नौकरी पक्की होती, शादी की खुशियां आती कि इसके पहले आतंकियों ने सब कुछ छीन लिया। मंगलवार को शाम तक एसओ उमाशंकर यादव को छोड़ कर कोई भी प्रशासनिक अफसर मृतकों के घर परिजनों को सांत्वना देने नहीं पहुंचा। इसका मलाल परिजनों और गांव के लोगों को है। वह चाहते हैं कि युवकों को शहीद का दर्जा मिले, ताकि उनका मरना व्यर्थ न जाए।

कई संगठनों ने की मांग

प्रतापगढ़ : आतंकी हमले में जान गंवाने वाले मांधाता के सलमान और इरशाद को शहीद का दर्जा देने की मांग हो रही है। माइनारटीज वेलफेयर सोसायटी की बैठक में मौलाना ताजदार अहमद, इसरारह अहमद, जफरुल हसन, मोहम्मद शोएब, अकबालुद्दीन, खुर्शीद आदि ने कहा कि मृतकों के परिजनों को 50-50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। मृतकों को शहीद का दर्जा देकर राजकीय सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई प्रशासन द्वारा दी जाए। इसी प्रकार कांग्रेस की बैठक में जिला महासचिव मेराजुद्दीन अहमद ने दोनों युवकों की मौत पर दुख व्यक्त करते हुए हमले की निंदा की।

देर रात तक शव का इंतजार

मांधाता,  मांधाता के दोनों युवकों के शव मंगलवार की रात तक घर नहीं पहुंच पाए थे। युवकों के परिजन और रिश्तेदार, गांव के लोग लगातार जम्मू में कैंप के अधिकारियों से संपर्क में थे। आधी रात के बाद शव आने की उम्मीद जताई जा रही थी। उधर, घायल अजीज को जम्मू में ही भर्ती कराया गया है। जिसका हाल लेने परिजन रवाना हो गए हैं।

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