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बुधवार, 15 फ़रवरी 2017

निषाद पार्टी को नई पहचान दे रहे हैं पूर्वांचल के दो बाहुबली

वाराणसी। जौनपुर और भदोही की सड़कों से गुजरते वक्त, हर मोड़ हर नुक्कड़ पर लाल झंडे दिखाए पड़ रहे हैं। सियासत के रंग को और गाढ़ा करता ये झंडा है निषाद पार्टी का। एक ऐसी पार्टी जिसका कल तक किसी ने नाम भी नहीं सुना होगा, लेकिन अचानक इसकी गूंज ने पूर्वांचल के कुछ सीटों पर समीकरण बदल दिए है। यूं तो ये पार्टी पुरानी है लेकिन इसे असल पहचान दी है पूर्वांचल के दो बाहुबली नेताओं ने। ज्ञानपुर सीट से तीन बार विधायक रहे विजय मिश्रा और जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह के सहारे निषाद पार्टी ने विधानसभा चुनाव के पहले ही रंग जमा लिया है। बुधवार को जौनपुर और भदोही में नामांकन के दौरान इसकी एक झलक भी देखने को मिली।

बदलने लगे पूर्वांचल के समीकर नामांकन में दोनों नेताओं ने दिखाई ताकत
विधानसभा चुनाव के पहले निषाद पार्टी ने बड़ा दांव खेला है। ज्ञानपुर से विजय मिश्रा का सपा से टिकट कटा तो निषाद पार्टी उन्हें अपने पाले में लाने में सफल रही। इसी तरह पार्टी ने जौनपुर के बाहुबली नेता धनंजय सिंह को भी अपने साथ जोड़कर दोनों ही जिलों में मजबूत पकड़ बना ली। पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद इन दोनों ही नेताओं के भरोसे चुनाव का ताना बाना बुन रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि पूर्वांचल में पार्टी का खाता खुलेगा। दरअसल विजय मिश्रा और धनंजय सिंह के निषाद पार्टी ज्वाइन करने के बाद तेजी से समीकरण बदले हैं। ये दोनों ही नेता भदोही और जौनपुर की सियासत में मजबूत पकड़ रखते हैं। दोनों के निषाद पार्टी में शामिल होने से इनके समर्थकों का बड़ा वर्ग इस पार्टी से जुड़ गया है। निषाद पार्टी के सिबंल पर चुनाव लड़ने वाले इन नेताओं की जनसभाओं में भी खूब भीड़ उमड़ रही है। लोगों के बीच निषाद पार्टी अब चर्चा का विषय बन गया है।

बुधवार को दोनों नेताओं ने नामांकन किया। विजय मिश्रा जहां ज्ञानपुर से चुनाव लड़ रहे हैं तो दूसरी ओर धनंजय सिंह मल्हनी सीट से चुनावी मैदान में हैं। दोनों के नामांकन जुलूस में समर्थकों की जमकर भीड़ उमड़ी। पूर्वांचल की राजनीत पर नजर रखने वाले नेता भी मान रहे हैं कि दोनों नेताओं के निषाद पार्टी में शामिल होने से कई सीटों पर प्रभाव पड़ेगा। क्योंकि इन दोनों नेताओं के समर्थक कई विधानसभा पर अपना प्रभाव रखते हैं। यही नहीं इन दोनों नेताओं के सहारे निषाद पार्टी उस बड़े फ्रंट का भी हिस्सा बन गई है, जिसमें पीस पार्टी और अपना दल (कृष्णा गुट) जैसी जनाधार वाली पार्टियां भी हैं।

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