सिंगरामऊ, जौनपुर के केंद्रीय पुस्तकालय में मनाई गई एवं उनके कार्यों को याद किया गया । गोष्ठी में वक्ताओं ने रंगनाथन के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उनको नयी पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्तम्भ बताया | कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ जे पी एन सिंह ने समस्त उपस्थित अतिथियों को राष्ट्रीय पुस्तकालयाध्यक्ष दिवस की बधाई दी एवं कहा कि भारत हमेशा महान विभूतियों की कर्मस्थली रहा है जिन्होंने अपनी विलक्षण एवं मौलिक प्रतिभा से विभिन्न क्षेत्रों में अनन्य योगदान दिया है, डॉ एस आर रंगनाथन भी ऐसी ही विभूति थे उन्होंनेे बताया कि पुस्तकों का स्थान इन्टरनेट कभी नहीं ले सकता । महाविद्यालय के पुस्तकालयाध्यक्ष श्री प्रमोद यादव ने कहा कि पुस्तकें जिन्दा लाशें नहीं हैं, हमें पाठको मे पढने की प्रवृत्ति को जगाये रखना है | उप पुस्तकालयाध्यक्ष मनीष कुुमार सिंह ने सभी आगन्तुकों को धन्यवाद ज्ञापित किया । इस अवसर पर डॉ शम्भू राम, डॉ अनुराग सिंह, डॉ गिरीश मणि त्रिपाठी, डॉ आनंद सिंह, सिंह ,संजय कुमार मिश्र, राम सिंह, अनवर, सूर्य कुमार सिंह, रणविजय ,सोनी जायसवाल, विजयसेन सिंह एवं उमेश शर्मा इत्यादि उपस्थित रहे |

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