डॉ ए. के. यादव
सिंगरामऊं - - ब्लू व्हेल गेम विदेश से अब देश के कोने-कोने में पहुंच चुका है। सर्वाधिक खौफ में अभिभावक वर्ग है। घर हों या बाहर वह लगातार इस समस्या से जूझ रहे हैं कि उनका बच्चा कहीं इस गेम का शिकार तो नहीं हुआ। ऐसे में स्कूलों में बच्चों के बीच छोटी-मोटी लड़ाई भी हो रही है तो लोगों का ध्यान तत्काल ब्लू व्हेल गेम की तरफ जा रहा है। देश में कई जिंदगियों को अपना निवाला बना चुके इस खेल का शिकार स्कूली बच्चें न हों। ऐसे में कस्बे में स्टेशन रोड स्थित मेजर अमर बहादुर सरस्वती सिंह बालिका इण्टर कालेज के प्रबंध निदेशक डॉ० संजय सिंह ने विद्यालय के बच्चों को इस खेल के विषय में बताया। कहा कि जिंदगी चुनिए, ब्लू व्हेल नहीं।
उन्होने बच्चों से ब्लू व्हेल गेम के विषय में पूछा, तो दशवीं की छात्रा प्राची दुबे ने जवाब दिया कि यह एक सुसाइड गेम है। ऐसे में वह इस गेम से दूर है। उन्होंने कहा कि यह खेल किसी के लिए भी हितकर नहीं है। नवीं कक्षा की दीक्षा मिश्रा व गरिमा शैनी ने बताया कि यह खतरनाक गेम है जो मोबाइल मे खेली जाती है।आठवीं की सुकृति दुबे ने इस गेम से अनभिज्ञता जाहिर की। डॉ० सिंह ने कहा कि एक रसियन व्यक्ति इस खेल का जन्मदाता है। उनका उद्देश्य था कि इस खेल के जरिए कमजोर लोगों को मौत के प्रति उकसाया जाए। ताकि धरती पर सिर्फ मजबूत लोग रहें, पर यह गलत है। घर मां-बाप बूढ़े होते हैं तो क्या कोई उन्हें मारता है। घर का कोई बच्चा विकलांग होता है तो कोई उसे मारता है। ऐसा नहीं होता। हर किसी के पास अपना टैंलेंट है। कोई पढ़ाई में होनहार है तो कोई सिंगिंग में, सारे बच्चे एक साथ परीक्षा देते हैं सभी मेधावी हों तो इसमें भी लोग प्रथम व अंतिम स्थान पर आएंगे। डॉ० सिंह इस खेल से दूर रहने की नसीहत देते हुए कहा कि यह भी देखें कि कोई फेसबुक पर अपना स्टेट्स कुछ अजीबों स्थिति में अपडेट कर रहा है। उनके घर का कोई सदस्य भोर में उठकर हारर मूवी तो नहीं देख रहा है। लोग अपने समाज को देखें। समाज के प्रति उनकी भी जिम्मेदारी है। समाज भी हमारे लिए आवश्यक है और हम भी समाज के लिए आवश्यक हैं। ऐसे में ब्लू व्हेल जैसे खेलों से दूर रहें। विद्यालय में प्रबंधक डॉ० बबली सिंह, प्रधानाचार्या अंतिमा सिंह सहित अध्यापक अध्यापिकाएं आदि मौजूद रहे
सिंगरामऊं - - ब्लू व्हेल गेम विदेश से अब देश के कोने-कोने में पहुंच चुका है। सर्वाधिक खौफ में अभिभावक वर्ग है। घर हों या बाहर वह लगातार इस समस्या से जूझ रहे हैं कि उनका बच्चा कहीं इस गेम का शिकार तो नहीं हुआ। ऐसे में स्कूलों में बच्चों के बीच छोटी-मोटी लड़ाई भी हो रही है तो लोगों का ध्यान तत्काल ब्लू व्हेल गेम की तरफ जा रहा है। देश में कई जिंदगियों को अपना निवाला बना चुके इस खेल का शिकार स्कूली बच्चें न हों। ऐसे में कस्बे में स्टेशन रोड स्थित मेजर अमर बहादुर सरस्वती सिंह बालिका इण्टर कालेज के प्रबंध निदेशक डॉ० संजय सिंह ने विद्यालय के बच्चों को इस खेल के विषय में बताया। कहा कि जिंदगी चुनिए, ब्लू व्हेल नहीं।
उन्होने बच्चों से ब्लू व्हेल गेम के विषय में पूछा, तो दशवीं की छात्रा प्राची दुबे ने जवाब दिया कि यह एक सुसाइड गेम है। ऐसे में वह इस गेम से दूर है। उन्होंने कहा कि यह खेल किसी के लिए भी हितकर नहीं है। नवीं कक्षा की दीक्षा मिश्रा व गरिमा शैनी ने बताया कि यह खतरनाक गेम है जो मोबाइल मे खेली जाती है।आठवीं की सुकृति दुबे ने इस गेम से अनभिज्ञता जाहिर की। डॉ० सिंह ने कहा कि एक रसियन व्यक्ति इस खेल का जन्मदाता है। उनका उद्देश्य था कि इस खेल के जरिए कमजोर लोगों को मौत के प्रति उकसाया जाए। ताकि धरती पर सिर्फ मजबूत लोग रहें, पर यह गलत है। घर मां-बाप बूढ़े होते हैं तो क्या कोई उन्हें मारता है। घर का कोई बच्चा विकलांग होता है तो कोई उसे मारता है। ऐसा नहीं होता। हर किसी के पास अपना टैंलेंट है। कोई पढ़ाई में होनहार है तो कोई सिंगिंग में, सारे बच्चे एक साथ परीक्षा देते हैं सभी मेधावी हों तो इसमें भी लोग प्रथम व अंतिम स्थान पर आएंगे। डॉ० सिंह इस खेल से दूर रहने की नसीहत देते हुए कहा कि यह भी देखें कि कोई फेसबुक पर अपना स्टेट्स कुछ अजीबों स्थिति में अपडेट कर रहा है। उनके घर का कोई सदस्य भोर में उठकर हारर मूवी तो नहीं देख रहा है। लोग अपने समाज को देखें। समाज के प्रति उनकी भी जिम्मेदारी है। समाज भी हमारे लिए आवश्यक है और हम भी समाज के लिए आवश्यक हैं। ऐसे में ब्लू व्हेल जैसे खेलों से दूर रहें। विद्यालय में प्रबंधक डॉ० बबली सिंह, प्रधानाचार्या अंतिमा सिंह सहित अध्यापक अध्यापिकाएं आदि मौजूद रहे

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