जौनपुर उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने आज वीर बहादुर सिंह पूर्वाचंल विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय भारतीय विश्वविद्यालय शिक्षा पध्दति विषयक राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। उन्होने सभा को सम्बोद्यित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय मे शिक्षा हालात सुधारने के लिए शैक्षिक कलेंडर जारी होने चाहिए। शिक्षा में हमेशा नई- नई विषयों को जोड़ना चाहिए। महिला शिक्षा को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने उपस्थित जनों को अधिक मतदान के लिए प्रेरित किया और कहा कि इंसान को तरक्की के लिए हमेशा सजग रहने की जरुरत है। इसलिए लोगों को हमेशा चलते रहना चाहिए। मंच से उतरने के बाद पत्रकारो से बातचीत में कहा कि ताज महल दुनिया की दृष्टिकोण से भारत का भूषण है। हमारे प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने भी स्पष्ट कर दिया है कि ताज हमारी धरोहर है। यदि कोई उपेक्षा करता है। यह नमक डालने का काम करता है जिसकी उसकी निंदा होनी चाहिए।
सम्पूर्णानन्द विश्वविद्यालय वाराणसी के कुलपति द्वारा की गई कर्मचारियों की नियुक्ति पर रोक लगाने के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि मेरे द्वारा और यूजीसी द्वारा कुछ गाईड लाईन दिया गया था लेकिन मेरे दिये गये गाईड लाईन की उपेक्षा करते हुए नियम विरूद्ध तरीके से पुराने विज्ञापन के अधार पर इण्टर व्यू लिया जा रहा था। मैंने कल ही इस पर रोक लगा दिया है। अब प्रदेश में आर्दश आचार संहिता लग गयी है। आचार संहिता समाप्त होने के बाद कर्मचारियों की नियुक्ति की जायेगी।
विशिष्ट अतिथि बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो रमेश चंद्रा ने कहा कि पूरे देश की शिक्षा व्यवस्था बदलाव के राह पर हैl हम विश्व में टॉप फाइव पर आने के इच्छुक हैं lइसके लिए हमें कड़ी मेहनत की जरूरत है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था और शासन की नीतियों का वर्णन करते हुए दोनों के बीच सामंजस्य पैदा करने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि मानदेय शिक्षकों से शिक्षा की गुणवत्ता को नहीं बढ़ाया जा सकता।
विशिष्ट अतिथि कार्य परिषद के सदस्य डॉ दीनानाथ सिंह ने कहा कि शिक्षा मन का भाव हैl यह जब मन में सार्थक भाव आता है तो सृष्टि होती है। lपंडित दीनदयाल उपाध्याय को उन्होंने मनीषी बताते हुए कहा कि प्रतिभाशाली छात्र होते हुए भी उन्होंने अपनी सारी डिग्रियों को ढिबरी में जला कर देश के पुनर्निर्माण में लग गए। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में प्रतिबद्धता के लिए सुसंवाद का होना जरूरी है नहीं तो उसके मूल्य मर जाएंगेl
अतिथियों का स्वागत करते हुए कुलपति प्रोफेसर डॉ राजाराम यादव ने कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में अनेक उपलब्धियों को अर्जित कर रहा है। देश का यह पहला ऐसा विश्वविद्यालय है जहां शोध की गुणवत्ता को दृष्टिगत रखते हुए विश्वविद्यालय ने अपने स्रोत से पोस्ट डॉक्टोरल फेलोशिप की व्यवस्था की है। परिसर में सांस्कृतिक एवं नैतिक संचार हेतु श्री राम कथा प्रवचन का आयोजन करने वाला यह देश का पहला विश्वविद्यालय हैं। उन्होंने कहा कि मेरा प्रयास है कि यहां के विद्यार्थियों को प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति के अनुरूप शिक्षा प्रदान की जाय। इसके लिए शीघ्र ही नए पाठ्क्रम प्रारम्भ किये जा रहे हैं।
धन्यवाद ज्ञापन सम्मेलन के संयोजक डॉक्टर अविनाश पाथर्डीकर एवं संचालन मीडिया प्रभारी डॉ मनोज मिश्र ने किया। इस अवसर पर प्रोफेसर बी.बी. तिवारी,डालमिया कॉलेज मुंबई प्राचार्य डॉ एन एन पांडेय, प्रो आर एन त्रिपाठी, प्रो आर एन सिंह, डॉ यूपी सिंह , डॉ लालजी त्रिपाठी,डॉ जगदीश चंद्र दीक्षित,डॉ बी डी शर्मा, डॉ राजीव प्रकाश सिंह, डॉ समर बहादुर सिंह,डॉ विजय कुमार सिंह, डॉ अजय दुबे, डॉ अखिलेश्वर शुक्ला ,डॉक्टर अजय द्विवेदी, डॉ सुनील कुमार, डॉ ए के श्रीवास्तव, डॉ वीरेंद्र विक्रम यादव, राकेश यादव, डॉ दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ दिनेश सिंह, डॉ संतोष कुमार, डॉ आर.एन. सिंह , डॉ ए के सिंह,डॉक्टर अवध बिहारी सिंह समस्त विद्यार्थी कर्मचारी मौजूद रहे ।
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