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मंगलवार, 9 जनवरी 2018

जनसुनवाई पोर्टल पर की गयी शिकायत की जॉच अधिकारी अपने अधीनस्थ को फारवर्ड कर देते हैं

जौनपुर सिंगरामऊं -उत्तर प्रदेश सरकर ने पोर्टल बनाया हुआ है, जिसका नाम 'जनसुनवाई' पोर्टल है। इसका उद्देश्य यह है कि उत्तर प्रदेश के लोग अपनी शिकायत अथवा सुझाव इस पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज करें और उसे सम्बंधित अधिकारी व सम्बंधित विभाग को भेजकर उसका निस्‍तारण किया जाय। परंतु हकीकत यह है कि आप यदि सरकार के जनसुनवाई पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराकर यह सोंच रहे हैं कि आपने अपनी शिकायत मुख्यमंत्री से कर दी है और अब आपकी समस्या का समाधान तुरंत हो जायेगा तो यह आपका भ्रम है, क्योंकि जनसुनवाई पोर्टल पर की गयी शिकायत की जॉच अधिकारी अपने अधीनस्थ को फारवर्ड कर देते हैं जिसके परिणाम स्वरूप आवेदक के प्रार्थना पत्र की जॉच व कार्यवाही संबंधित विभाग के निचले स्तर के कर्मचारी द्वारा की जाती है, उसी आख्या पर अधिकारी अपने हस्ताक्षर कर पोर्टल पर अपलोड कर देते हैं। अब सवाल यह उठता है कि इस तरह की कार्यवाही का मकसद सरकार द्वारा अधिकारियो की मिलीभगत से जनता को बेवकूफ बनाना या अधिकारियों द्वारा जनता मे विश्वास पैदा करना है।
पिछली सरकार में तो इस पोर्टल पर मजाक चल ही रहा था। पर इस सरकार से लोगों की उम्मीदें कुछ ज्यादा ही बढ़ गयीं। मुख्यमत्री योगी भी लोगों की अपेछाओं पर खरा उतरने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों और मंत्रियों सभी को निर्देश दिए हैं कि कोई भी फाइल किसी भी टेबल पर तीन दिन से अधिक नहीं रुकनी चहिये, यह होने भी लगा। परन्तु अफसरशाही और लालफीता शाही को कौन दुरुस्त करे? यह आसान काम नहीं है। आखिर पुरानी व्यवस्थाओं में रचे बसे लोग इतनी जल्दी सुधरने का नाम तो ले नहीं सकते।
जितनी भी जनसुनवाई पोर्टल पर जनता द्वारा शिकायत भेजी जाती है, अफसरों द्वारा उनमें कमी निकलने का भरपूर प्रयास किया जाता है। जनता द्वारा भेजा गया आवेदन बस जनता से अधिकारी के आॅफिस और अधिकारी के आॅफिस से वापस जनता के पास निस्तारित लिखकर भेजा जा रहा है।
निस्तारित का वास्तविक अर्थ यह होता है कि समस्‍या का समाधान हो चुका है। पर यहाँ (जनसुनवाई पोर्टल पर) निस्तारित का अर्थ है कि अधिकारी या सम्बंधित विभाग द्वारा उस आवेदन पर कोई न कोई बहाना बनाकर वापस जस का तस आवेदनकर्ता के पास भेज दिया गया है। कई बार तो आवेदन केवल सरसरी निगाह से ही पढ़े जाते हैं और उसमें क्या लिखा है यह भी सम्बंधित विभाग नहीं जानता। कुछ भी उल्टा-सीधा तर्क देकर वापस आवेदनकर्ता के पास निस्तारित लिखकर भेज दिया जाता है।
नजीर के तौर पर जौनपुर के बदलापुर तहसील के गॉव पूरारजवार के भूमिधरी खाते की भूखंड संख्या 334 पर दबंगो द्वारा अतिक्रमण कर मकान बना लेने के बावत अनिल कुमार जनसुनवाई पोर्टल पर पिछले छः महीने से अतिक्रमण हटवाने के लिए आवेदन कर रहे है। परंतु बिना मौके पर गये ही जमीन पर किसी प्रकार का अतिक्रमण नही किया गया लिख कर आख्या  निस्तारित कर दी गयी। मामले को पुन: संदर्भित किया गया तो पोर्टल से आदेशित किया गया कि मामले को गंभीरता पूर्वक देखा जाय और निस्तारण की तिथि भी नियत कर दी गयी थी, परंतु नियत तिथि बीत जाने के बाद भी मामला लंबित पड़ा है।इस तरह जनसुनवाई पोर्टल भी आम लोगो के लिए मजाक बन कर रह गया।

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