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शनिवार, 28 जुलाई 2018

"बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ" सम्बन्धी  पुनीत कार्य  के तहत एक बालिका का एक वर्ष की सम्पूर्ण पढ़ाई का खर्च *गुरु पुर्णिमा*  के मौके पर  बिजली विभाग के कांट्रेक्टर कबेली गाँव निवासी राकेश कुमार दुबे 

बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ (इसका अर्थ है लड़कियों को बचाना और शिक्षित करना) योजना की शुरुआत भारतीय सरकार द्वारा 2015 के जनवरी महीने में हुई। इस योजना का मकसद भारतीय समाज में लड़कियों और महिलाओं के लिये कल्याणकारी कार्यों की कुशलता को बढ़ाने के साथ-साथ लोगों के बीच जागरुकता उत्पन्न करने के लिये भी है। इस योजना के लिये 100 करोड़ की शुरुआती पूँजी की आवश्यकता थी।

इस योजना की शुरुआत की जरुरत 2001 के सेंसस के आँकड़ों के अनुसार हुई, जिसके तहत हमारे देश में 0 से 6 साल के बीच का लिंगानुपात हर 1000 लड़कों पर 927 लड़कियों का था। इसके बाद इसमें 2011 में और गिरावट देखी गयी तथा अब आँकड़ा 1000 लड़कों पर 918 लड़कियों तक पहुँच चुका था। 2012 में यूनिसेफ द्वारा पूरे विश्वभर में 195 देशों में भारत का स्थान 41वाँ था इसी वजह से भारत में महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा के प्रति लोगों की जागरुकता जरुरी हो गयी। ये योजना कन्या भ्रूण हत्या को जड़ से मिटाने के लिये लोगों से आह्वन भी करती है।

ऐसे में बेटी पढाओ , बेटी बचाओ के लिए लिया एक बालिका को गोंद कवेली के राकेश दुबे ।

 "बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ" सम्बन्धी  पुनीत कार्य  के तहत एक बालिका का एक वर्ष की सम्पूर्ण पढ़ाई का खर्च *गुरु पुर्णिमा*  के मौके पर  बिजली विभाग के कांट्रेक्टर कबेली गाँव निवासी राकेश कुमार दुबे जी द्वारा लिया गया। श्री दुबे जी ने M.A.B.S.S. GIRLS INTAR COLLEGE SINARAMAU की  एक गरीब बेटी  को  वार्षिक शिक्षा  हेतु  गोद लेकर  उसकी  शिक्षा व्यवस्था  पर  आने वाले  खर्च की जिम्मेदारी  का संकल्प विद्यालय परिवार के समक्ष लिया ।
 इस मौके पर श्री दूबे जी ने  कहा कि *"एक ब्यक्ति - एक बेटी "* के  राष्टी्य शैक्षिक अभियान  मे  हर समर्थ ब्यक्ति  को  एक- एक  गरीब की बेटी  की  *शिक्षा हेतु  गोद*  लेना चाहिए । घर परिवार  की  रीढ  एंव  देश की  आधी आबादी के  *शैक्षिक उत्थान* के  लिए  प्रयास  करना चाहिए। इस पुनीत कार्य के लिए विद्यालय परिवार ने उन्हें कोटिशः बधाई दी।

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