सिंगरामऊ (जौनपुर) समय की ऐसी हवा चली की एक मजदूर को मजबूरी में परिवार को ठेलिया पर लादकर सात सौ किलोमीटर दूर दिल्ली से जौनपुर तक आ गया। पूरे देश मे लाकडाउन हुआ तो ट्रेन, बस सब बंद हो गई। दिल्ली से साधन के अभाव में एक मजदूर ठेलिया से पत्नी व बच्चों के साथ सात सौ किलोमीटर का सफर तय करके सोमवार को जिले के बॉर्डर पर पहुँचा। वहां स्थित पुलिस चेक पोस्ट पर उसे चेक करने के बाद आगे जाने दिया गया। लगातार सात दिनों तक ठेलिया से सफर करते हुए जिले की सीमा पर पहुंचे जौनपुर के रमेश कुमार ने बताया कि वह दिल्ली में मजदूरी करके परिवार का भरण-पोषण करता था।लाकडाउन के बाद वहां काम बंद ही गया। बस, ट्रेन भी बंद हो गयी। दिल्ली से घर आने के लिए जब उसे कोई उपाय न सूझा तो मजबूरी में वह 28 मार्च को ठेलिया पर ही सारा सामान लादकर पत्नी व बच्चों के साथ घर के लिए निकल पड़ा। सात दिनों बाद वह अपने जिले में पहुँचा है। रमेश ने बताया कि चार दिनों का राशन था, बाद में जगह-जगह लोगों ने मदद की और वह ठेलिया से ही इतनी लंबी दूरी तय कर अपने घर पहुँच जाएगा।
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मंगलवार, 7 अप्रैल 2020
रमेश परिवार सहित सात सौ किमी ठेलिया से आया जौनपुर।
सिंगरामऊ (जौनपुर) समय की ऐसी हवा चली की एक मजदूर को मजबूरी में परिवार को ठेलिया पर लादकर सात सौ किलोमीटर दूर दिल्ली से जौनपुर तक आ गया। पूरे देश मे लाकडाउन हुआ तो ट्रेन, बस सब बंद हो गई। दिल्ली से साधन के अभाव में एक मजदूर ठेलिया से पत्नी व बच्चों के साथ सात सौ किलोमीटर का सफर तय करके सोमवार को जिले के बॉर्डर पर पहुँचा। वहां स्थित पुलिस चेक पोस्ट पर उसे चेक करने के बाद आगे जाने दिया गया। लगातार सात दिनों तक ठेलिया से सफर करते हुए जिले की सीमा पर पहुंचे जौनपुर के रमेश कुमार ने बताया कि वह दिल्ली में मजदूरी करके परिवार का भरण-पोषण करता था।लाकडाउन के बाद वहां काम बंद ही गया। बस, ट्रेन भी बंद हो गयी। दिल्ली से घर आने के लिए जब उसे कोई उपाय न सूझा तो मजबूरी में वह 28 मार्च को ठेलिया पर ही सारा सामान लादकर पत्नी व बच्चों के साथ घर के लिए निकल पड़ा। सात दिनों बाद वह अपने जिले में पहुँचा है। रमेश ने बताया कि चार दिनों का राशन था, बाद में जगह-जगह लोगों ने मदद की और वह ठेलिया से ही इतनी लंबी दूरी तय कर अपने घर पहुँच जाएगा।
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