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गुरुवार, 15 सितंबर 2016

बिपुल सिंह

पीली ईंट और सफेद देशी बालू से बनायी जा रही परिषदीय स्कूलों की चहरदिवारी।

सिंगरामऊ / जौनपुर -विकास खण्ड बदलापुर के न्याय पंचायत जोखापुर और अर्जुनपुर के विभिन्न ग्राम पंचायतों मे चौदहवां राज्य वित्त के तहत परिषदीय विद्यालयों में बाउंड्री वाल का निर्माण कराया जा रहा है जो कि मानक के विपरीत है, अधिकांश विद्यालयों में सेमा ईंटो के साथ देशी सफेद बालू का प्रयोग किया जा रहा है जिसमें बालू और सीमेंट के अनुपात को भी मानक के विपरीत देखा जा रहा है। इस विषय में संबधित लोगों से बात करने पर बताया गया कि मानक के अनुसार अव्वल दर्जे की ईंट के साथ मोरंग बालू में सीमेंट का अनुपात एक और चार का होना चाहिए। इसके बावजूद विद्यालयों की बाउंड्री वाल घटिया ईंटों से देशी बालू और सीमेंट का अनुपात कहीं एक और छ: तथा कहीं तो एक और सात के अनुपात से बनायी जा रही है, घटिया सामग्री और सीमेंट बालू के इस अनुपात से बनायी जा रही बाउंड्री वाल की मजबूती का अंदाजा लगाया जा सकता है। प्रा० वि० जमऊपट्टी व मेढ़ा में बाउंड्री वाल और प्रा० वि० रामीपुर में बना शौचालय इसका ज्वलंत उदाहरण हैं, जहॉ मानक को ताक पर रखकर प्रधान और सेक्रेटरी लूट खसोट में मस्त होकर बेशर्मी की सीमा लॉघ चुके है। इस बावत कुछ और ग्राम प्रधानों और ग्राम विकास अधिकारियों से बात की गयी तो लोंगो ने बताया कि जो मानक  है उसके हिसाब से धन का आवंटन नही होता है जिसके कारण हम लोगों को उसी पैसे मे किसी तरह समायोजित करके ऊपर वालों को भी कमीशन देना पड़ता है।

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