जौनपुर - सिंगरामऊं - प्रदेश में नई सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी सड़कों को गढ्डामुक्त करने के लिए 15 जून की डेडलाइन तय की थी,समय सीमा समाप्त भी हो गयी लेकिन बदलापुर तहसील क्षेत्र में अभी तक ऐसी बहुत सी सड़कें हैं, जिनमें गढ्डे भरना तो दूर, काम शुरू ही नहीं हो सका। क्षेत्र की सड़कें इतनी जर्जर है कि उस पर स्वस्थ व्यक्ति का भी पैदल चलना मुश्किल है। ऐसे हालात में किसी मरीज को इस सड़क से अस्पताल तक ले जाना कितना जोखिम भरा होगा, इसका सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है।
तहसील क्षेत्र के कई गावों के सम्पर्क मार्ग एवं प्रमुख मार्गो के गढ्डे सूरत बदलने वालों की याद में खोए हुए हैं। इन सड़कों की दुर्दशा वर्षो पुरानी है। इसके चलते हालत बद से बदतर हो गई है। जब प्रदेश में तीन माह पूर्व नई सरकार बनी तो उम्मीद जगी कि इनके भाग्य बदलेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 15 जून तक प्रदेश की सभी सड़कों को गढ्डा मुक्त करने के निर्देश दिए तो उम्मीदों को पंख लग गए। लोगों को लगा कि अब गांव-देहात की सड़कों के भी दिन बहुरेंगे, मगर प्रमुख मार्गो तक की किस्मत फूटी दिख रही है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद कार्य तो प्रारम्भ हुआ, लेकिन अपेक्षानुरूप परिणाम सामने नहीं दिखा।भले ही डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य प्रदेश में 63 प्रतिशत सड़कों को गढ्ढा मुक्त करने का थोथा दावा कर रहे हों। उनका दावा इस क्षेत्र के लिए बिलकुल कोरा साबित हो रहा है क्योंकि 63 प्रतिशत में क्षेत्र की एक भी सड़क नही है। दावो की हकीकत जानने के लिए एक नजर क्षेत्र की कुछ सड़कों पर डालते हैं जिन पर पैदल चलना भी किसी चुनौती से कम नही है। तियरा से कस्तूरीपुर के रास्ते बदलापुर जाने वाली सड़क, तियरा से शाहपुर, सरायगुंजा से लखनेपुर, रामनगर से मेढ़ा मार्ग, मेढ़ा से जमऊपट्टी सरकारी अस्पताल का मार्ग, रतासी से अमिलिया के गोमती नदी पुल वाली सड़क, रामीपुर से डड़ारी,रतासी से आराजी अनुसार, बहरीपुर से घाघरपारा होते हुए अंदीपुर के रास्ते नकहरा खानदेव मार्ग, सिंगरामऊ बाजार से पूरालाल मार्ग, गोनौली से कवेली मार्ग, कुशहां से बदलापुर, चंदापुर गजेन्द्रपुर मार्ग, खजुरन से पूरालाल मार्ग। इन सड़कों पर गंभीर मरीजों खासतौर से प्रसव पीड़ा के समय गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक ले जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। हादसे के शिकार लोगों को ले जाना तो जोखिमभरा है। सड़क पूरी तरह उखड़ चुकी है। गॉव के लोग इस मार्ग का प्रयोग मॉर्निंग वॉक के लिए भी करते रहे हैं।इनमें गोनौली कवेली मार्ग जैसी कुछ सड़कों का अस्तित्व ही खत्म होने के कगार पर है।
Blog
▼
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
have any doutes. please let me