जौनपुर सिंगरामऊं - -भाजपा की प्रदेश सरकार ने सूबे के भूमाफियाओ के चंगुल से जमीनो को मुक्तकरने के लिए प्र फर्जी निस्तारण के मामले में बदलापुर भी पीछे नहीं। देश भर मे एंटी भूमाफिया टास्क फोर्स का गठन किया है। लेकिन बदलापुर तहसील में जाकर हकीकत देखनी हो तो कुछ और ही नजारा दिखाई पड़ता है। सरकारी कर्मचारी विकास कार्यों एवं जन कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन तथा जन शिकायतों के निस्तारण में रुचि नही दिखा रहे हैं। मुख्यमंत्री सहित अन्य अधिकारियो को भेजे गए पीड़ितों के शिकायत पत्रों पर कार्यवाई के बजाय फर्जी जांच रिपोर्ट प्रेषित कर उनका निस्तारित होना दर्शाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ले रहे हैं। न तो भू माफियाओं के विरुद्ध कोई कार्यवाही की गई और न ही माफियाओं को चिन्हित कर उसे सार्वजनिक ही किया गया। इतना ही नहीं चिन्हित करने में भी राजस्व कर्मियों ने व्यापक खेल किया है। बड़े भू-माफियाओं पर दर्जनों बार शिकायतों के बावजूद कोई कार्यवाई नहीं हो सकी है। भ्रष्टाचार के दर्जनों मामले में उच्चाधिकारियों ने कड़ी कार्रवाई करने के बजाय महज खाना पूरी कर उच्चाधिकारियों ने अपना कर्तव्य समझ लिया। आखिरकार वादकारियों को न्याय कब मिलेगा और लोग कब तक शिकायतों के जंजाल में जूझते रहेंगे ?
ममला न0 एक- बदलापुर तहसील व थानान्तर्गत गॉव पूरारजवार का है, जहां गाटा संख्या 334/0.1620 हे० पर हुए अतिक्रमण के लिए अनिल कुमार द्वारा 30 जुलाई 2017 को जनसुनवाई पोर्टल पर संदर्भ संख्या 40019417005219 के तहत आवेदन किया था।जिसमें 14 अगस्त निस्तारण तिथि नियत की गयी। और बिना मौके गये ही तत्कालीन हल्का लेखपाल और कानूनगो 24 अगस्त को आख्या लगाये कि उक्त जमीन राम लखन आदि के नाम खतौनी में संक्रमणीय भूमिधर के खाते में दर्ज है, और उस पर किसी प्रकार का अतिक्रमण नही है। उसी आख्या के आधार पर उपजिलाधिकारी द्वारा भी आख्या प्रेषित कर दी गयी कि उक्त जमीन पर किसी तरह का अतिक्रमण नही किया गया है। पोर्टल से आवेदनकर्ता को शिकायत निस्तारण का मैसेज आ गया। जबकि आज भी उक्त जमीन पर अतिक्रमण उसी तरह बना हुआ है।
ममला न0 दो - बदलापुर तहसील अंतर्गत ग्राम रतासी का है जहॉ पर सरकारी ग्राम समाज के ऊसर खाते की जमीन पर दबंगो के द्वारा अबैध रूप से जमीन हथियाने के मामले को गॉव के रघुनाथ यादव द्वारा आईजीआरएस र्पोर्टल के संदर्भ संख्या 4109417000481 पर अंकित किया गया। जिस पर हल्का लेखपाल लालचंद्र गौतम नेआख्या रिर्पोट लगाते हुए लिखा है कि उक्त जमीन के कब्जा धारको का कब्जा पॉच वर्ष पूर्व से है और उन लोगो के पक्ष में राजस्व नियम 67 A(1) के तहत आवादी दर्ज कराने के लिए पत्रावली तहसील में है। जबकि उक्त जमीन के लिए राजकीय संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा न्यायांलय में लंबित है।
मामला- न० तीन - - सरायगुंजा निवासी मनोज शुक्ला ने ग्राम सभा की आरक्षित भीटा की भूमि आ० संख्या 243/0.150 हे० पर दबंगो द्वारा कब्जा करने का आरोप लगाते हुए जनसुनवाई पोर्टल पर संदर्भ संख्या 40019417013831 के तहत आवेदन किया तो लेखपाल की आख्या रिपोर्ट में उक्त आराजी को अतिक्रमण मुक्त दिखाकर मामले का निस्तारण कर दिया गया जबकि आवेदनकर्ता का कहना है कि बिना मौका देखे ही लेखपाल ने फर्जी आख्या लगाकर निस्तारण कर दिया है। प्रदेश सरकार तालाब और सरकारी जमीनो से अबैध कबजे को हटाने के लाख प्रयत्न कर ले लेकिन तहसील प्रशासन इन कबजेदारो के उपर महेरबान है तो किसी का क्या माजाल कि इन भू माफियाओ पर प्रशासनिक कार्यवाही करवा ले। इसी तरह बहुत ऐसे मामले है जिन्हे फर्जी तरींके से निस्तारित दिखाया गया है। योगी के शासन मे सरकारी मुलाजिम कागजी घोड़ा दौड़ा कर अपनी पीठ थपथपवा रहे है। जबकि धरातल पर कुछ न नजर आने के कारण विपक्ष के निशाने पर है। ऐसे मे सरकार का सबका साथ सबका विकास का र्फामूला कैसे लागू होगा पर प्रश्न चिन्ह है।
tikhiawaz24.in
बुधवार, 6 दिसंबर 2017
देश भर मे एंटी भूमाफिया टास्क फोर्स का गठन किया है। लेकिन बदलापुर तहसील में जाकर हकीकत देखनी हो तो कुछ और ही नजारा दिखाई पड़ता
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें