देशभर के पत्रकारों पर हो रही हिंसा चिंता का सबब बनती जा रही है। बसपा से निकाले गए पूर्व सांसद ब्रजेश पाठक (भाजपा) ने मंगलवार को नेशनल दस्तक के एडिटर शंभू कुमार सिंह पर हमला किया। यही नहीं उनके कैमरामेन जगदीश गौतम से कैमरा छीन लिया गया। पत्रकार शंभू कुमार सिंह की ओर से संसद मार्ग थाने में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। गौरतलब है कि शंभू कुमार सिंह ने बीजेपी नेता ब्रजेश पाठक से कुछ सवाल किए लेकिन जैसे ही परिवारवाद को लेकर सवाल किया तो वह आपे से बाहर हो गए। और उन्होने शंभू कुमार सिंह को थप्पड़ मार दिया।
साल 2014 के लोकसभा में पूर्ण बहुमत की मोदी सरकार आई। सभी के अच्छे दिनों के आने का नारा दिया था। लेकिन क्या वाकई में ऐसा हुआ तो जवाब मिलेगा...नही। मोदी सरकार में मंत्रियों के ऊपर सत्ता में बहुमत से आने का नशा इस कदर सवार है कि पूरे देश में बीजेपी शासित राज्यों में जमकर तानाशाही रवैया अपनाया हुआ है। आलम ये है कि देश में बीजेपी नेताओं के खिलाफ आवाज ऊठाने पर उस आवाज को हमेशा के लिए ही बंद किया जा रहा है।
पीएम मोदी ने सत्ता हासिल करने के लिए "सबका साथ सबका विकास" नारा तो दे दिया लेकिन उनकी सरकार इस नारे पर अमल नहीं कर पा रही हैं। पत्रकारों के खिलाफ पर हो रही हिंसा बड़ा सवाल बनता जा रहा है। कब-कब पत्रकारौं पर हिंसा के मामले सामने आए हैं। आइए जानते कुछ महत्वपूर्ण घटनाक्रम..
मोदी सरकार के बीते दो साल पत्रकारिता और पत्रकारों के लिए सबसे बुरे दिनों में से रहे। बीजेपी नेताओं पर कुछ पत्रकारों के सवाल दिल पर इस कदर चुभे कि अगले दिन उस पत्रकार की आवाज़ और सवाल दोनों ही सुनाई देने को नही मिले।
ताजा गुजरात के जूनागढ़ का मामला है। जय हिंद अखबार के ब्यूरो चीफ किशोर दवे को उनके ऑफिस में ही घुस कर चाकू से गोंदकर हत्या कर दी गई...हत्या की वजह बीजेपी सरकार के पूर्व कृषि मंत्री के बेटे और किशोर दवे के बीच आपसी रंजिश को बताया जा रहा है...मंत्री के बेटे पर महिला से यौन शोषण का आरोप था जिसको किशोर दवे ने अपने अखबार में प्रकाशित किया था...जिसको लेकर मंत्री और किशोर दवे के बीच रंजिश चल रही थीजो बाद में किशोर दवे की मौत का कारण बनी...
13 मई 2016... रात 8 बजे। बिहार के सिवान में हिंदुस्तान अखबार के सीनियर जर्नलिस्ट राजदेव रंजन को घर लौटते वक्त बीच रास्ते में दो अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी। राजदेव रंजन ने सिवान के पूर्व सांसद मों. शहाबुद्दीन की क्षेत्र में गुंडागर्दी के खिलाफ जंग छेड़ रखी थी। शाहबुद्दीन राजदेव रंजन की उनके खिलाफ खबरों से इतने परेशान थे कि उन्होने राजदेव को जान से मारने की सुपारी दी थी। और उसके बाद राजदेव की हत्या होना इस बात को साफ दर्शाता है एक नेता के खिलाफ पत्रकार की उठती आवाज़ को कैसे और किस तरह दबाया जाता है।
जनसंदेश टाईम्स के ब्यूरो चीफ करूण मिश्रा। जिन्होने अपने क्षेत्र सुल्तानपुर में अवैध खनन के खिलाफ समय समय पर खबर लिखकर एक मुहिम चला रखी थी... क्षेत्र में अवैध खनन का काम पवन सिंह और अमन सिंह नाम के दो शख्स मंत्रियों के साथ सांठगांठ करके कर रहे थे। करूण मिश्रा अपनी खबरों को लेकर अवैध खनन करने वालों की आंखों में इस कदर चुभंने लगे थे कि बात उनकी सुपारी तक पहुंच गई और एक नही बल्कि 5 लोगों को उनकी सुपारी दे दी गई और 13 फरवरी 2016 को दिनदहाड़े सुल्तानपुर में घर जा रहे करूण मिश्रा पर दो बाईकसवारों ने ताबड़तोड़ गोलिया चला कर उनकी हत्या कर दी।
देश भर में पत्रकारों पर हुए हमलों में जगेनद्र सिंह पर हुआ हमला बेहद ही दर्दनाक था। स्वतंत्र पत्रकार जगेनद्र सिंह सपा नेता राम मूर्तिसिंह के खिलाफ क्षेत्र में गुंडागर्दी के खिलाफ खड़े थे। इसी के चलते सपा नेता जगेंद्र से खफा चल रहे थे। 8 जून 2015 की देर रात जगेंद्र के घर पर पुलिस ने रेड के बहाने उनके बच्चों के सामने बहुत बुरी तरह पीटा और पुलिस वाले यही नही रूके। उनके ऊपर कैरोसिन का तेल डालकर उनको आग के हवाले कर दिया। इस हादसे में करीब उनका आधे से ज्यादा शरीर जल गया और उनकी अस्पताल में ही मौत हो गई।
पत्रकारों ने जब जब किसी बड़े गोरख धंधों पर से पर्दा उठाये है उसके बदले उन्हे मौत ही मिली है। इसी कड़ी में अगला नाम MVN SHANKAR का है जो ANDHRA PRABHA DAILY के वरिष्ठ पत्रकार थे। शंकर ने राज्य में जनता को बांटे जा रहे घटिया कैरोसिन को लेकर खबर चलाई थी। जिसके चलते सरकार के कुछ लोग और वहां के तेल माफियाओं को काफी नुकसान उठाना पड़ा था। और इसी के चलते उनकी दिनदहाड़े बीच रास्ते में लोहे की रोड़ से पीट पीट कर हत्या कर दी गई।
देश में चाईल्ड लेबर बैन है। लेकिन पुलिस और प्रशासन की मिली भगत के कारण ओड़िशा मे काजू की खेती में बगान मालिकों ने बच्चों को ही काम पर लगा रखा था। कनक टीवी के पत्रकार तरुण कुमार आचार्य ने हो रहे चाईल्ड लैबर की सच्चाई लोगों के सामने रखी तो बगान मालिकों ने तरुण का गला काटकर सड़क पर फेंक दिया।
जौनपुर: देशभर के पत्रकारों पर हो रही हिंसा चिंता का सबब बनती जा रही है। बसपा से निकाले गए पूर्व सांसद ब्रजेश पाठक (भाजपा) ने मंगलवार को नेशनल दस्तक के एडिटर शंभू कुमार सिंह पर हमला किया। यही नहीं उनके कैमरामेन जगदीश गौतम से कैमरा छीन लिया गया। पत्रकार शंभू कुमार सिंह की ओर से संसद मार्ग थाने में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। गौरतलब है कि शंभू कुमार सिंह ने बीजेपी नेता ब्रजेश पाठक से कुछ सवाल किए लेकिन जैसे ही परिवारवाद को लेकर सवाल किया तो वह आपे से बाहर हो गए। और उन्होने शंभू कुमार सिंह को थप्पड़ मार दिया।
साल 2014 के लोकसभा में पूर्ण बहुमत की मोदी सरकार आई। सभी के अच्छे दिनों के आने का नारा दिया था। लेकिन क्या वाकई में ऐसा हुआ तो जवाब मिलेगा...नही। मोदी सरकार में मंत्रियों के ऊपर सत्ता में बहुमत से आने का नशा इस कदर सवार है कि पूरे देश में बीजेपी शासित राज्यों में जमकर तानाशाही रवैया अपनाया हुआ है। आलम ये है कि देश में बीजेपी नेताओं के खिलाफ आवाज ऊठाने पर उस आवाज को हमेशा के लिए ही बंद किया जा रहा है।
पीएम मोदी ने सत्ता हासिल करने के लिए "सबका साथ सबका विकास" नारा तो दे दिया लेकिन उनकी सरकार इस नारे पर अमल नहीं कर पा रही हैं। पत्रकारों के खिलाफ पर हो रही हिंसा बड़ा सवाल बनता जा रहा है। कब-कब पत्रकारौं पर हिंसा के मामले सामने आए हैं। आइए जानते कुछ महत्वपूर्ण घटनाक्रम..
मोदी सरकार के बीते दो साल पत्रकारिता और पत्रकारों के लिए सबसे बुरे दिनों में से रहे। बीजेपी नेताओं पर कुछ पत्रकारों के सवाल दिल पर इस कदर चुभे कि अगले दिन उस पत्रकार की आवाज़ और सवाल दोनों ही सुनाई देने को नही मिले।
ताजा गुजरात के जूनागढ़ का मामला है। जय हिंद अखबार के ब्यूरो चीफ किशोर दवे को उनके ऑफिस में ही घुस कर चाकू से गोंदकर हत्या कर दी गई...हत्या की वजह बीजेपी सरकार के पूर्व कृषि मंत्री के बेटे और किशोर दवे के बीच आपसी रंजिश को बताया जा रहा है...मंत्री के बेटे पर महिला से यौन शोषण का आरोप था जिसको किशोर दवे ने अपने अखबार में प्रकाशित किया था...जिसको लेकर मंत्री और किशोर दवे के बीच रंजिश चल रही थीजो बाद में किशोर दवे की मौत का कारण बनी...
13 मई 2016... रात 8 बजे। बिहार के सिवान में हिंदुस्तान अखबार के सीनियर जर्नलिस्ट राजदेव रंजन को घर लौटते वक्त बीच रास्ते में दो अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी। राजदेव रंजन ने सिवान के पूर्व सांसद मों. शहाबुद्दीन की क्षेत्र में गुंडागर्दी के खिलाफ जंग छेड़ रखी थी। शाहबुद्दीन राजदेव रंजन की उनके खिलाफ खबरों से इतने परेशान थे कि उन्होने राजदेव को जान से मारने की सुपारी दी थी। और उसके बाद राजदेव की हत्या होना इस बात को साफ दर्शाता है एक नेता के खिलाफ पत्रकार की उठती आवाज़ को कैसे और किस तरह दबाया जाता है।
जनसंदेश टाईम्स के ब्यूरो चीफ करूण मिश्रा। जिन्होने अपने क्षेत्र सुल्तान पुर में अवैध खनन के खिलाफ समय समय पर खबर लिखकर एक मुहिम चला रखी थी... क्षेत्र में अवैध खनन का काम पवन सिंह और अमन सिंह नाम के दो शख्स मंत्रियों के साथ सांठगांठ करके कर रहे थे। करूण मिश्रा अपनी खबरों को लेकर अवैध खनन करने वालों की आंखों में इस कदर चुभंने लगे थे कि बात उनकी सुपारी तक पहुंच गई और एक नही बल्कि 5 लोगों को उनकी सुपारी दे दी गई और 13 फरवरी 2016 को दिनदहाड़े सुल्तानपुर में घर जा रहे करूण मिश्रा पर दो बाईकसवारों ने ताबड़तोड़ गोलिया चला कर उनकी हत्या कर दी।
देश भर में पत्रकारों पर हुए हमलों में जगेनद्र सिंह पर हुआ हमला बेहद ही दर्दनाक था। स्वतंत्र पत्रकार जगेनद्र सिंह सपा नेता राम मूर्तिसिंह के खिलाफ क्षेत्र में गुंडागर्दी के खिलाफ खड़े थे। इसी के चलते सपा नेता जगेंद्र से खफा चल रहे थे। 8 जून 2015 की देर रात जगेंद्र के घर पर पुलिस ने रेड के बहाने उनके बच्चों के सामने बहुत बुरी तरह पीटा और पुलिस वाले यही नही रूके। उनके ऊपर कैरोसिन का तेल डालकर उनको आग के हवाले कर दिया। इस हादसे में करीब उनका आधे से ज्यादा शरीर जल गया और उनकी अस्पताल में ही मौत हो गई।
पत्रकारों ने जब जब किसी बड़े गोरख धंधों पर से पर्दा उठाये है उसके बदले उन्हे मौत ही मिली है। इसी कड़ी में अगला नाम MVN SHANKAR का है जो ANDHRA PRABHA DAILY के वरिष्ठ पत्रकार थे। शंकर ने राज्य में जनता को बांटे जा रहे घटिया कैरोसिन को लेकर खबर चलाई थी। जिसके चलते सरकार के कुछ लोग और वहां के तेल माफियाओं को काफी नुकसान उठाना पड़ा था। और इसी के चलते उनकी दिनदहाड़े बीच रास्ते में लोहे की रोड़ से पीट पीट कर हत्या कर दी गई।
देश में चाईल्ड लेबर बैन है। लेकिन पुलिस और प्रशासन की मिली भगत के कारण ओड़िशा मे काजू की खेती में बगान मालिकों ने बच्चों को ही काम पर लगा रखा था। कनक टीवी के पत्रकार तरुण कुमार आचार्य ने हो रहे चाईल्ड लैबर की सच्चाई लोगों के सामने रखी तो बगान मालिकों ने तरुण का गला काटकर सड़क पर फेंक दिया।
सच के सामने लाने के लिए पत्रकार किसी भी हद तक जा सकते है और किसी से भी टकरा सकते है। ये वो कुछ नाम है जो जीती जागती मिसाल है कि देश और लोगों के लिए कि सच के लिए इन्होने अपनी जान की बाज़ी तक लगा दी।
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