सुल्तानपुर
कोई विज्ञान वर्ग से स्नातक उत्तीर्ण हैं तो कोई कला वर्ग से। कुछ लोग परास्नातक की भी डिग्री हासिल किए हैं। ऐसे 75 युवाओं ने गत वर्षों में स्वरोजगार का प्रशिक्षण प्राप्त किया था, जिन्हें कहीं काम नहीं मिला। अब पशु चिकित्सा विभाग ने खुरपका-मुंहपका रोग का टीका लगाने का उन्हें काम दिया। हर दिन सौ रुपये मिलेंगे। जिसके एवज में उतने ही मवेशियों को टीका भी लगाना होगा। बेरोजगारी के चलते ये पैरावेट मजदूरों से भी कम पैसे में कार्य करने को मजबूर हैं। दिहाड़ी पर काम करने
वाले मजदूर रोजाना अमूमन 300 रुपये लेते हैं। पर पशु चिकित्सा विभाग में काम करने वाले लिखे-पढ़े और स्वरोजगार का प्रशिक्षण प्राप्त पैरावेट कर्मियों को महज सौ रुपये में ही संतोष करना होगा। इसके एवज में उन्हें दिनभर में कम से कम 100 मवेशियों को टीके लगाने होंगे। यदि इससे अधिक टीका लगाया तो भी उसका फायदा उन्हें नहीं मिलने वाला, क्योंकि महकमा सशर्त काम कराएगा।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अजीत कुमार सिंह बताते हैं कि विभाग में चिकित्सक, फार्मासिस्ट व पशुधन प्रसार अधिकारियों की कमी लंबे अर्से से चली आ रही है। कई पद अभी भी खाली हैं। इससे विभागीय कामकाज तो प्रभावित हो ही रहा है, किसी कार्यक्रम या अभियान के संचालन में खासी दिक्कते होती हैं। ऐसे में सहयोगी विभागों के कर्मचारियों या बाहरी लोगों की मदद लेकर काम चलाया जाता है। पैरावेट कर्मियों को नियमानुसार मेहनताना दिया जा जाएगा।
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