जौनपुर तनख्वाह की तरह ही पेंशन भी कर्मचारी का मौलिक अधिकार है। सेवा शर्तों में उसे समय पर पेंशन उपलब्ध कराना नियोक्ता का दायित्व निश्चित है ।वही मानवता के आधार पर भी एक सेवानिवृत्त कर्मी जिसका जीवन आधार पेंशन हो उसे समय से यह मिलती रही यह सुनिश्चित करना नियोक्ता और उसके अफसरों नैतिक दायित्व भी है। लेकिन जिला प्रशासन की अनदेखी ,लचर नीति और हृदय हीनता के कारण जिला पंचायत की केंद्रीय सेवा संवर्ग के सेवानिवृत्त कर्मियों को पिछले कई महीनों से पेंशन नहीं मिल पा रही है । जिसके कारण यह सेवानिवृत्त कर्मीअपनी दैनिक जरूरतों के लिए दूसरे का मुह देख रहे हैं। पेंशन का भुगतान ना होने का कारण जिम्मेदार अधिकारी का पद लंबे समय से खाली रहना बताया जाता है। प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला पंचायत की केंद्रीय सेवा संवर्ग के सेवानिवृत्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए पेंशन की धनराशि उपनिदेशक जिला पंचायत अनुश्रवण पंचायती राज विभाग की है ।जहां से जनपद के 8 सेवानिवृत्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए पेंशन ,महंगाई राहत आदि के भुगतान करने के लिए धनराशि जिला पंचायत जो उपलब्ध कराई जाती है। अब इस धनराशि के बिल पर ज़िला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी और वित्तीय परामर्शदाता द्वारा स्वीकृत दिए जाने के बाद अधिकारी द्वय द्वारा चेक पर हस्ताक्षर किए जाते हैं। लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग द्वारा जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी रघुनाथ सिंह यादव का तबादला अन्यत्र कर दिया। जनपद में तब से यह पद रिक्त चल रहा है । चेक पर हस्ताक्षर के लिए जिम्मेदार अधिकारी उपलब्ध नहीं होने के कारण गत जनवरी माह से पेंशन का भुगतान रुका हुआ है । पिछले चार पांच माह से पेंशन न मिलने से इन पेंशन भोगियों की आर्थिक स्थिति डावा डोल हो चुकी है। उन्हें अपनी तमाम जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर होना पड रहा है और उनके दूसरे काम भी रुके पड़े हैं ।
ऐसी विषम परिस्थितियों में पेंशनभोगियों की पेंशन दूसरे और जरूरी भुगतानों के लिए उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत व जिला पंचायत अधिनियम 1961 की धारा 78 में वर्णित अधिकारों का प्रयोग करते हुए जिले के मुख्य विकास अधिकारी स्वयं बिल एवं चेक पर हस्ताक्षर से भुगतान करा सकते हैं। इस संबंध में पेंशन भोगी अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने दर्जनों बार पत्रक सौंपकर एवं राज्यपाल तक को पत्र लिखकर त्वरित कार्रवाई की मांग भी की है । लेकिन कोई सार्थक पहल न होने
के कारण अब उनके सामने जीवन मरण का प्रश्न खड़ा हो गया है ।
एक सुझाव यह भी है कि पेंशनभोगियों की सुविधा एवं लिखा-पढ़ी का भार कम करने के लिए सरकार इन पेंशनरों का भुगतान जिला पंचायत जोनपुर के माध्यम से करने के बजाय राज्य सरकार के अन्य पेंशनरों की भांति जिला पंचायत अनुश्रवण पंचायती राज विभाग द्वारा पेंशनरों के बैंक खातों में सीधे भेज दे । इससे व्यवस्था को आसान बनाया जा सकता है और पेंशनरों का समय पर भुगतान भी सुनिश्चित हो जाएगा।
लेकिन देखना है कि लालफीताशाही इन सेवानिवृत्त कर्मियों की पेंशन के समयबद्ध भुगतान के लिए कब सजग होती हैं । आज की तारीख में दूसरे पेंशनरों के भुगतान के लिए हृदयहीनता दिखाने वाले इन अधिकारियों को कम से कम यह तो सोचना चाहिए कि कल उन्हे भी पेंशन भोगी होना है और उन्हें भी इन्हीं परिस्थितियों से गुजरना पड़ सकता है ।उन्हें भी अपने दैनिक जरूरतो से ले कर बीमारी, बच्चों की शिक्षा , उनके शादी विवाह के लिए धन के इंतजाम मे ऐसे ही दर दर भटकना पड़ सकता है।
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