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मंगलवार, 9 मई 2017

पेट्रोल पम्पों पर इंस्टाल करने वालों का सरगना अजय चौरसिया को आज गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स(एसटीएफ) ने पेट्रोल पम्पों पर घटतौली के लिए इलेक्ट्रानिक चिप डिवाइस की सप्लाई कर उन्हें सैकड़ों पेट्रोल पम्पों पर इंस्टाल करने वालों का सरगना अजय चौरसिया को आज गिरफ्तार कर लिया। एसटीएफ सूत्रों के अनुसार एसटीएफ ने गत 27 अप्रैल की रात को घटतौली के खिलाफ कार्रवाई में लखनऊ शहर के 07 पेट्रोल पम्पों का पर्दाफाश करते हुए 23 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया था। पूछताछ पर गिरफ्तार अभियुक्त राजेन्द्र ने बताया था कि वह डालीगंज स्थित एक पेट्रोल पम्प पर पिछले बीस वर्षों से बिजली मिस्त्री था और वहां काम करने के दौरान पेट्रोल पम्पों पर घटतौली के लिए चिप लगाने वाले गिरोह के सम्पर्क में आया। पूछताछ में चौरसिया ने स्वीकार किया कि उसने मुजफ्फरनगर स्थित जौहर अब्बास को कई बार चिप भेजी है, जिसको पल्सर यूनिट में लगाकर घटतौली की जाती है। उसने बताया कि पिछले सप्ताह घटतौली का खुलासा हो जाने के बाद उसने अपने पास रखी चिपें मोहान पुल, सई नदी, उन्नाव में फेंकी थीं। कुछ चिपें घर पर रखी हो सकती हैं। इस आधार पर एसटीएफ टीम ने अजय चाँरसिया को साथ लेकर घर पर तलाशी की। उसके घर पर घटतौली के लिए इस्तेमाल होने वाली चार चिपें और बांट-माप विभाग के निरीक्षकों द्वारा पम्प के संवेदनशील पुर्जो को सील करने के लिए प्रयोग में लायी जाने वाली तीन सीलें भी बरामद हुयीं। इसके अतिरिक्त उसके घर पर बड़ी संख्या में पेट्रोल पम्पों में लगने वाले विभिन्न प्रकार के सर्किट यथा पल्सर कार्ड, कंट्रोल कार्ड, डिस्प्ले कार्ड व डायफ्राम आदि मिले। इसके अलावा चौरसिया के घर पर छिपाकर रखी हुयी एल0 एण्ड टी0 कम्पनी की एक पूरी डिस्पेंसिंग यूनिट भी बरामद हुयी। पूछताछ पर अजय चौरसिया ने बताया कि उसने वर्ष 2000 से 2004 तक विभिन्न स्थानों पर गैस पाइप लाइन मेन्टीनेंस का कार्य किया था। बाद में उसने डिस्पेन्सिंग यूनिट मशीनों की मरम्मत का काम सीखा। मुम्बई में इंटरव्यू देने के बाद वह एल0 एण्ड टी0 कम्पनी के उत्तर प्रदेश जोन-1 में गोरखपुर में तैनात किया गया। मुम्बई ट्रेनिंग के दौरान ही उसका सम्पर्क कुछ ऐसे लोगों से हुआ, जिन्होंने डिस्पेंसिंग यूनिट के पल्सर कार्ड में चिप लगाकर घटतौली के लुभावने धन्धे की जानकारी दी। गोरखपुर तैनाती के दौरान कम्पनी के स्टेट हेड द्वारा किसी अनियमितता पर टोकने पर अनुशासनहीनता के कारण उसे कम्पनी से हटा दिया गया। वर्ष 2013 में उसने मिडको कम्पनी ज्वाइन कर ली। पिछले पांच-छह वर्षों में चौरसिया का एक बड़ा नेटवर्क बन गया जिसमें एक ओर वह अपने मुम्बई स्थित सम्पर्की से चिप प्राप्त करता था और दूसरी ओर उत्तर प्रदेश में अपने सम्पर्कियों को ऊंचे दामों पर बेंच देता था।`

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