विकास की डोर सड़कों की हालत से जुड़ी होती है, क्योंकि सड़क का विकास बुनियादी है जिसकी मदद से ही अन्य विकास कार्य संभव हो पाते हैं। ऐसे में गांव इसमें पिछड़ रहे हैं, क्योंकि अधिकतर गांवों में सड़कों की हालत संतोषजनक नहीं है। इससे गांव का विकास भी अछूता रह गया है।
गांवों में न तो सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था का लाभ मिल पाता है और न ही विकास कार्यो की गति तेज हो पाती है। ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए सड़कों के विकास और उन्हें बेहतर बनाने की योजनाओं को प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल किया जाना जरूरी है।
तियरा से बहरीपुर होते हुए ढकवा सम्पर्क मार्ग पर लगभग 1.5 किमी सड़क की हालत खस्ता है। सड़कों पर मौजूद गड्ढे जिले में विकास की रफ्तार को आइना दिखा रहे हैं। इन गांवों को शहर से जोड़ने वाले मुख्य सड़क हो या गांव की गलियां, सबकी हालत लगभग एक जैसी है। कहीं कच्ची ईट और टूटे सीमेंट के टुकड़े रास्तों में रोड़ा बनकर पड़े हैं तो कहीं कई गांव के लोग आज भी कच्चे रास्तों पर ही सफर कर रहे हैं। सैकड़ों वर्ष पुराने इन गांवों में विकास की डोर मजबूत नहीं होने से ग्रामीणों को कई प्रकार की असुविधा हो रही है। सड़कों की खराब हालत के कारण वाहनों को चलाने में भी परेशानी आती है। कई इलाकों में सड़क निर्माण कार्य तो हुआ लेकिन रखरखाव की कमी और नालियों के न होने से उनमें गड्ढे बन गए। ऐसे में देखा जाए तो गांव के विकास के लिए सड़क, गली का निर्माण और उनका रखरखाव बेहद आवश्यक है।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें