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सोमवार, 13 अप्रैल 2020

सामाजिक दूरी ही एक औषधी...गणेश शुक्ल ( शोध छात्र ) संतरविदास नगर भदोही


आज मानव जाति के समक्ष एक ऐसा संकट उपस्थित हुआ है, जिसकी वैज्ञानिकों को न तो कोई आशंका थी और न ही उसका सामना करने की तैयारी। यह संकट है कोरोना वायरस के संक्रमण से तेजी से फैल रही कोविड-19 नामक महामारी का। वस्तुतः आज तो यही कहा जा सकता है कि वैश्विक स्तर पर किये जा रहे मानवीय प्रयास शीघ्र सफल होंगे और कोविड -19 का उन्मूलन उसी तरह संभव होगा जैसे प्लेग, टी.बी.चेचक इत्यादि का हुआ। यह समस्या मनुष्य जाति के सामने कई प्रश्न उपस्थित कर दिए जिस पर मानव समाज को गहनता से विचार विमर्श करने की आवश्यकता है। आज उन तमाम विकसित देशों के इस अहंकार को धक्का लगा है, जो दावा करते हैं  कि उसने प्रकृति के रहस्यों को समझने और उस पर नियंत्रण करने की क्षमता प्राप्त कर ली है। इस महामारी ने मनुष्य के ज्ञान और समझ की अपूर्णता को जग जाहिर कर दिया है । कोरोना विश्व के करीब 200 देशों को प्रभावित कर चुका है और प्रभावित करता चला जा रहा है। आज वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के अनुसार वैश्विक स्तर पर मौत का आंकड़ा एक लाख के करीब पहुच चुका है, तथा 15 लाख लोग इस वायरस से संक्रमित हो गए हैं। भारत में संक्रमितों की संख्या 7 हजार के पार पहुच गयी है। जबकि पूरे भारत मे पिछले दो हफ्ते से लॉक डाउन चल रहा है। यह एक भयावह स्थिति है, परन्तु यहाँ के लोग अपने विभिन्न कारणों से  इस विकट स्थिति को समझ नही पा रहें है, जैसा कि हम सब जानते हैं वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के अनुसार इटली में 18 हजार तथा स्पेन में 15 हजार लोग काल कलवित हो चुके है, और यह सिलसिला रुकने का नाम नही ले रहा है। जिसके मूल में एक मात्र कारण फिजिकल डिस्टेंसिंग को अनदेखा करना, वहां बड़ी संख्या में मजदूरों का पलायन हुआ और इस वायरस का संक्रमण कुछ ही दिनों में तेजी से फैल गया। इसी तरह की स्थिति भारत मे भी देखने को मिल रही है जो संक्रमण बढ़ाने में सोने पर सुहागा साबित हो रहा है । आज नही तो कल लॉक डाउन हटेगा तो हम सब की नैतिक जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि हम सब अनुशासित, संयमित, तथा सोसल डिस्टेंसिंग (सामाजिक दूरी ) के साथ जीवन यापन करे। याद रखना होगा कि सोसल डिस्टेंसिंग इस महामारी का एक मात्र इलाज है, वर्ना देश गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहे ।
                             

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