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मंगलवार, 10 जनवरी 2017

रामसेवक विश्कर्मा

प्रतापगढ़

लाठी-डंडे से पीटकर प्लंबर की हत्या


संग्रामगढ़ थाना क्षेत्र के साहब अतेरू गांव में रविवार की रात तेरहवीं में शामिल होने गए प्लंबर जियालाल की लाठी-डंडे से पीटकर हत्या कर दी गई। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

संग्रामगढ़ थाना क्षेत्र के कस्बा लतीफपुर गांव निवासी जियालाल(35) पुत्र मंगरे रविवार को अपनी पत्नी सुमन देवी के साथ मौसिया ससुर धर्मराज गौतम निवासी साहब अतेरु के घर बाइक से गया था। वहां से वह देर रात वह अपने ममिया ससुर मनोहर को छोड़ने बाइक से मानिकपुर थाना क्षेत्र के बहरामई गांव गया था। देर रात जब वह साहब अतेरु गांव नहीं पहुंचा तो लोगों को चिंता होने लगी। लोगों ने बहरामई फोनकर पता किया तो पता चला कि वह काफी देर पहले निकल गया है। लोगों ने उसकी खोजबीन शुरू की तो गांव से करीब एक किलोमीटर दूर सड़क के किनारे उसकी बाइक खड़ी मिली। खोजबीन के दौरान सड़क से पचास मीटर दूर गेहूं के खेत में जियालाल का रक्तरंजित शव पड़ा मिला। सूचना मिलते ही परिजन भी मौके पर पहुंच गए और कोहराम मच गया। मामले में देर रात मृतक के ससुर प्यारे लाल निवासी कालाकांकर नवाबगंज ने अज्ञात लोगों के खिलाफ घटना की तहरीर दी। संग्रामगढ़ थानाध्यक्ष सुरेश कुमार सैनी का कहना है कि अज्ञात हमलावरों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। हत्या के कारणों की तलाश की जा रही है।

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पुलिस का शक आशनाई पर
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बाबागंज जियालाल दिल्ली में रहकर प्लंबर का काम करता था। घर पर उसकी पत्नी सुमन तीन बच्चों के साथ रहती थी। मौसिया ससुर धर्मराज की मौत की सूचना पर वह बीते 29 दिसंबर को दिल्ली से चला था और 30 को घर पहुंच गया था। वह जब से घर आया तब से रोजाना साहब अतेरू आता था और रविवार को धर्मराज की तेरहवीं में शामिल होने पत्नी के साथ आया हुआ था। हत्या कैसे हुई, किसने की, क्यों की, यह बातें लोगों के जेहन में नहीं आ रही हैं, क्योंकि जिया लाल का न तो कोई जमीन का विवाद था और न ही कोई पैसे का लेनदेन का। आखिर उसकी हत्या क्यों हुई यह बात कोई नहीं बता पा रहा है। फिलहाल चर्चा पर गौर करें तो कहीं जिया लाल की हत्या का कारण आशनाई तो नहीं है। पुलिस हर बिंदु को ध्यान में रखकर मामले की जांच बारीकी से कर रही है।

आखिर कौन करेगा तीनों बच्चों की परवरिश
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संग्रामगढ़  कस्बा लतीफपुर गांव निवासी मंगरू के तीन बेटे थे। छेदी लाल की बीमारी के कारण मौत हो गई थी। जबकि रामकुमार व जिया लाल हैं। परिवार का खर्च न चलने के कारण जियालाल ने दिल्ली जाकर प्लंबरिंग का काम शुरू कर दिया था। वह अपने पीछे पत्नी सुमन, दस वर्षीय बेटी चांदनी, पांच वर्षीय अंशिका व तीन वर्षीय बेटे हिमांशु को छोड़ गया है। अब इन मासूमों का सहारा कौन बनेगा, क्योंकि आज भी जियालाल का परिवार छप्पर के नीचे रहकर जीवन यापन करता है।

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