मेरे ऊर्जावान भाइयों एवं बहनों , यथोचित अभिवादन। पुरानी पेंशन बहाली के लिए शिक्षक,अधिकारी,कर्मचारियों ने अपने,अपने जिलों में पेंशन बहाली हेतु पेंशन बहाली मंच के बैनर तले जन जागरण किया,और 8अक्टूबर को लखनऊ में विशाल धरना दिया। विधानसभा का घेराव किया। सरकार सकते में आयी।मंच के प्रतिनिधिमंडल से वार्ता हुयी। सार्थक परिणाम न मिलने पर पुनः 25th,26th और 27th को पूर्ण तालाबंदी और हड़ताल की घोषणा। अब ये आंदोलन गति पकड़ चुका था।लोगों की शिरकत ने आभास कराया कि मंजिल पर ही रूकना है।सरकार की खुफिया एजेंसियोंने हड़ताल की तैयारी से सरकार को अवगत कराया। सरकार ने पुनः प्रतिनिधि मंडल को वार्ता हेतु आमंत्रित किया,मुख्यमंत्रीने छ महिने का समय माॅगा।जिससे सरकार पुरानी पेंशन पर निर्णय ले सके,प्रतिनिधि मंडल ने दो महीने का समय दिया। उसके बाद पुनः आंदोलन पेंशन बहाली तक जारी रहेगा। अचानक हड़ताल स्थगन से उत्साहित साथी जो विगत कई महीनों से मंच के बैनर तले आर पार की लड़ाई हेतु तैयार थे उन्हे झटका लगा। मै उनकी ऊर्जा,और उत्साह का अभिवादन करता हूँ। और उम्मीद करता हूँ कि अगर निर्धारित समय में कोई सकारात्मक बात सामने नहीं आती है तो पुनः हम सब अपने लक्ष्य की प्राप्ति तक संघर्ष करेंगे। देश की आजादी के लिए जो आंदोलन हुए उसमे गाँधी जी का असहयोग आन्दोलन भी आज के परिप्रेक्ष्य में स्मृति मे आता है।सारा देश इस आंदोलन में कूद चूका था। लोगों को आजादी दिखाई देने ही वाली थी कि गाँधी जी ने आंदोलन वापस लेने की घोषणा कर दी। गाँधी जी के इस निर्णय का पूरे भारत में विरोध हुआ। नेता जी सुभाष चन्द्र बोस ने इसकी तीव्र भर्त्सना की।परन्तु इसका मतलब यह नहीं कि पुनः आंदोलन न किया जाए। 1922 में गाँधी जी ने जिस आंदोलन को वापस लिया,उसके बाद पुनः एक न एक कई आंदोलन हुए,जो स्वतंत्रता प्राप्ति तक जारी रहे।हमे इतिहास से सीखना होगा,अपनी ऊर्जा,संयम को बनाये रखना होगा।दोषारोपण से बचना होगा। कदम मिलाकर चलना होगा। मंजिल निश्चित ही हम सब के कदम चूमेगी। मुझे विश्वास है कि हमारा नेतृत्व वही राह चुनेगा, जो हमे मंजिल तक पहुंचाए। एक बार पुनः आप सभी का अभिवादन।

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