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गुरुवार, 14 मई 2020

✍️कइसे चले घर भाई, पुलिस बाबू हमैं द बताई...बड़ी विडंबना है....... कल तक जे जे चाइनीज डिस ठेला लगाई के बेचत रहेन उ आज पलकी, मुरई, तरबूजा चिल्लाई-चिल्लाई के घरे-घरे बेचत अहेन। यहि लिए कि ठेला के बिक्री से परिवार चलावै के बा। हमार बात त छोड़ि द, छोटका लड़िका पांच-छह दिन से रोटी के बात करत रहा। केवल कोटा के चावल रहा उहौ खतम होई ग। मास्क हमरे नाइबा, ई पुरनका गमछा बांधे हई। देखत अह न, इहउ कई जगह से फटि ग ब। ई पीड़ा बा रेहड़ी, ठेलिया वालन के। किसान रामराज बोलेन----- हे राम, का मुंबई, का दिल्ली का सूरत सब भागि आवत बाटेंन, लड़िकवा के शराब के आदत छूटत नाइ बा, शराब के ठीका जउने दिन से खुला, उही दिन से घर में रखा कोटे वाला चावल चोरी चला जाता बा, आब का होए।रजुआ मुंबई से भागि आई हऊ, सुरेशवा दिल्ली से छोटा हाथी में बैठिके आई हऊ, एनहन अउर दिक्कत करत बाटेंन। घरेन में बइठा बाटेंन। 21 दिन अंदरवै रहियै। आगे मिलते हैं रामचरन काका बोले भईया हमार जनधन खाता खुला रहा उम्मे पांच सौ आई बा, पांच दिन बैंक के गोला में खड़ा रहे अंत मे निकला, सुरती, सब्जी के काम चला। कुछ जने खाना त कुछ जने सीधा, पिसान, खाना बाटत अहेन। लिकिन कब तक। परधान के चेलवा अशोकवा जब तक न कहे तब तक राशन मिलब मोश्किल बा। होउ मोन्नवा उ पत्रकारन के जानथ, ओका मिलि ग, कुछ पत्रकार रातो-दिन जनता के दुख दर्द में सहायता पहुचाई रहा है,और अधिकारिन के फोन पे फोन कई रहा अहेन, एनही के ही बले पे सगरौ के समाचार मिलत बा।सरकारी डॉक्टर, दरोगा,पुलिस, कानून गो, लेखपाल सब जने, दिन रात ड्यूटी करत अहेन, घरे नाइ जातेन।का भाय मुसई--कहो भइया ई करोनावां क मामिला कब तक जाए। कुछ नाइ समझात बाटइ। स्कूलन के मालिक चुप मारे हयेन, एकदम हाय तौबा नाइ करत हयेन। ऑनलाइन पढ़ाई, किताब, सब मजबूरी में बांटत हयेन, उहौ उधारी, मास्टरन के तनखाह नगद देत बाँटेन। ठिकय बा बहुत मजा मारत रहें अब तनि फांका मारै। --------जौंन ई लिखेन ऊ रहेन *"संजय पत्रकार"*

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