केवटली गाँव में चल रही भागवद कथा
जौनपुर कथावाचक पंडित शिवेश शास्त्री ने श्रीमद भागवद कथा का रसपान कराते हुए कहाकि.......मेरी लगी श्याम संग प्रीत की दुनिया क्या जाने, कृष्ण की कथा का सार है प्रेम के महत्त्व का रसपान। रसपान कराकर लोगो को मंत्रमुग्ध करने वाले श्याम बांसुरी बजाकर सबको रिझाने में ही मशगूल हैं। लोग विह्वल है उनकी बांसुरी की गहराई व प्रेम का भाव सुनकर। लोग कृष्ण की विदाई की बेला में भी भावुक हैं, अपने प्रिय का अलग होना खाल रहा है। लोग तन, मन,धन, त्याग कर, बावरे होकर, श्याम के लिए व्याकुल हुए जा रहे हैं। भगवान् ने ऐसा भाव व्यक्त किया कि लोग उन्हें ख़ुशी ख़ुशी विदा करने को तैयार हो गए। प्रेम का ऐसा स्वरूप जो लोगो के दिल को छू जाये, तो उसकी परिकल्पना ही श्रेयस्कर होती है। आज उस प्रेम को महसूस कर गोपिया ही नहीं भगवान श्रीकृष्ण भी अभिभूत है। सारे लोग महसूस करके उसकी गहराई को नापने में जुटे हैं। हर कोई कान्हा को अपने करीब पा रहा है, लेकिन विदाई की इस वेला में हर किसी का दिल बैठा जा रहा है। यह दृश्य लोग देखकर अभिभूत हैं।
जौनपुर कथावाचक पंडित शिवेश शास्त्री ने श्रीमद भागवद कथा का रसपान कराते हुए कहाकि.......मेरी लगी श्याम संग प्रीत की दुनिया क्या जाने, कृष्ण की कथा का सार है प्रेम के महत्त्व का रसपान। रसपान कराकर लोगो को मंत्रमुग्ध करने वाले श्याम बांसुरी बजाकर सबको रिझाने में ही मशगूल हैं। लोग विह्वल है उनकी बांसुरी की गहराई व प्रेम का भाव सुनकर। लोग कृष्ण की विदाई की बेला में भी भावुक हैं, अपने प्रिय का अलग होना खाल रहा है। लोग तन, मन,धन, त्याग कर, बावरे होकर, श्याम के लिए व्याकुल हुए जा रहे हैं। भगवान् ने ऐसा भाव व्यक्त किया कि लोग उन्हें ख़ुशी ख़ुशी विदा करने को तैयार हो गए। प्रेम का ऐसा स्वरूप जो लोगो के दिल को छू जाये, तो उसकी परिकल्पना ही श्रेयस्कर होती है। आज उस प्रेम को महसूस कर गोपिया ही नहीं भगवान श्रीकृष्ण भी अभिभूत है। सारे लोग महसूस करके उसकी गहराई को नापने में जुटे हैं। हर कोई कान्हा को अपने करीब पा रहा है, लेकिन विदाई की इस वेला में हर किसी का दिल बैठा जा रहा है। यह दृश्य लोग देखकर अभिभूत हैं।

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