*💥सुप्रीम कोर्ट ने कहा, गांवों में पैसा पहुंचाने के लिए क्या कर रही है सरकार*
नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह जानना चाहा है कि नोटबंदी के बाद ग्रामीण इलाकों में लोगों को हो रही असुविधा के मद्देनजर क्या कदम उठाए गए हैं। वास्तव में शीर्ष अदालत ने यह महसूस किया कि ग्रामीण इलाकों के अधिकतर लोग सहकारी बैंकों पर निर्भर रहते हैं।
चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से पैरवी कर रहे अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी से पूछा कि ग्रामीण इलाकों में हो रही पेरशानी से कैसे निपटा जा रहा है। जवाब में अटॉर्नी जनरल ने कहा कि सरकार सहकारी बैंकों की स्थिति से भली भांति परिचित है। उन्होंने कहा कि सरकार इस बात से भी अवगत है कि सरकारी बैकों के मुकाबले सहकारी बैंकों में आधारभूत सहित सुविधाओं का अभाव है।
उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा दाखिल हलफनामे में एक पूरा अध्याय ही सहकारी बैंकों पर है। उन्होंने कहा कि सरकार ने जानबूझ कर इस पूरे ड्राइव से सहकारी बैंकों को अलग रखा हुआ है क्योंकि उनके पास फर्जी नोटों की पहचान के लिए विशेषज्ञ नहीं हैं। वहीं सहकारी बैंकों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील पी चिदंबरम ने सरकार के निर्णय पर सवाल उठाते हुए कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है।
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