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सोमवार, 24 जुलाई 2017

आज जिस आयु वर्ग के युवा तनाव व अवसाद झेल रहे हैं, वे परिवार और समाज के सपोर्ट सिस्टम से दूर ही रहे हैं

शनिवार को जफराबाद और सिकरारा में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। यह बैठक ब्राह्मण सदस्यों के बीच हुई। बैठक में समाज की उन बुराईयों पर प्रहार किया गया। जिनसे आम आदमी बुरी तरह प्रभावित होकर विकास के रास्ते से दूर चला जाता है।ब्राह्मण समाज हमेशा समाज के उत्थान में अहम भूमिका निभाता रहा है। यह रुकना नहीं चाहिए।अन्य ब्राह्मणों से अपील की है कि इस संगठन में अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करें, ताकि अपने विवेक, बुद्धि और कौशल से समाज को एक बेहतर दिशा दी जा सके।
किसी भी राष्ट्र अथवा देश के नवयुवक उस राष्ट्र के विकास एवं निर्माण की आधारशिला होते हैं । स्वस्थ नवयुवक ही स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं ।

 इस कर्यक्रम की अध्यक्षता आशीष शुक्ला व
संचालन पंकज मिश्रा ने किया ।


अवनीश उपाध्याय ने बताया इन युवकों से ही देश की वास्तविक पहचान होती है । यदि देश के नवयुवकों में चारित्रिक दृढ़ता व नैतिक मूल्यों का समावेश है तथा वे बौद्‌धिक, मानसिक, धार्मिक एवं आध्यात्मिक शक्तियों से परिपूर्ण हैं तो निस्संदेह हम एक स्वस्थ एवं विकसित राष्ट्र की कल्पना कर सकते हैं ।

परंतु यदि हमारे युवकों की मानसिकता रुग्ण है अथवा उनमें नैतिक मूल्यों का अभाव है तो यह देश अथवा राष्ट्र का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है क्योंकि इन परिस्थितियों में विकास की कल्पना केवल कल्पना तक ही सीमित रह सकती है, उसे यथार्थ का रूप नहीं दिया जा सकता है ।

आशीष शुक्ला का कहना है समाज के अंदर मौजूदा समय में तमाम तरह के दुर्गुण व्याप्त हैं। जिनका सबसे अधिक शिकार युवा वर्ग होता है। जिस घर का सदस्य बुराईयों की ओर बढ़ जाता है। उसके परिवार में क्लेश, समस्याएं व तमाम तरह की मुसीबतें अपना घर बना लेती हैं। इसलिए जरूरी है कि समाज को एक स्वस्थ संदेश इस बात का जाए कि इन नशा, दुगुर्णों आदि से  बचाया जाए। यह बातें हमारे बड़े एवं छोटे भाईयो के बीच मे हुई जिसमें..   विकास शुक्ला,कल्लू दूबे, अमित मिश्रा, अबोध शुक्ला, आनंद,विवेक वरदान एवं पंकज शुक्ला आदि उपस्थित रहे।

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