मुगराबादशाहपुर --राज्य परिवहन निगम का बादशाहपुर डिपो अपने ही बिभागीय अधिकारियो की लापरवाही एवं जन प्रतिनिधियो कीउदाशीनता का दंश भुगत अपनी दुर्दशा पर बिधवा बिलाप कर रहा है |आलम यह है की कभी वाराणसी परिक्षेत्र मे बसो के लोड फैक्टर एवं आय मे पहला स्थान रखने वाला यह डिपो बिभागीय अधिकारियो की आपसी जंग एवं तालमेल के न होने का खामियाजा इस डिपो को भुगतना पड़ा | वर्ष 1988 मे परिवहन निगम के मुख्यालय द्वारा मुगराबादशाहपुर बस स्टेशन को डिपो घोषित कर वाराणसी परिक्षेत्र से समब्ध किया गया था | जिसके संचालन का सारा दारोमदार जौनपुर डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबन्धक के आधीन कर दिया गया |उस समय डिपो को 25 बसे उपलब्ध कराकर संचालन शुरू किया गया | बादशाहपुर डिपो की ब॒सो को वाराणसी ,इलाहाबाद,गोरखपुर ,लखनऊ,बहराइच प्रतापगढ़, कानपुर के साथ ही बेलवार एवं बदलापुर रूट पर चलाया गया | बसो की मरम्मत के लिये वर्क शाप भी खोलकर फोरमैन फिटर व तकनीकी कर्मचारी तथा कुशल संचालन हेतु एक बरिष्ठ केन्द्र प्रभारी ,दो सहायक स्टेशन इंचार्ज 8 लिपिको के साथ चालक /परिचालक नियुक्त किये गये | डिपो का अपना सक्षम अधिकारी नही होने का खामियाजा भी डिपो को भुगतना पड़ता रहा | वाराणसी से बादशाहपुर डिपो के लिए भेजी जाने वाली नई बसे जौनपुर मे ही रोक कर उनके बदले पुरानी बसे भेज दी जाती रही | बावजूद इसके डिपो मे तैनात कर्मी कड़ी मेहनत कर औसत आय एवं लोड फैक्टर मे पहला स्थान रखते रहे | लेकिन डिपो की आय मे ग्रहड़ की भूमिका निभा रहे सहायक क्षेत्रीय प्रबन्धक जौनपुर डिपो ने धीरे -धीरे बसो की संख्या कम करते गये तथा डिपो मे बसो की सख्या 25 से घट कर 17 पर पहुच गयी | वर्ष 2009मे बादशाहपुर डिपो को वाराणसी से हटा कर इलाहाबाद रीजन को सौंप दिया गया तथा संचालन सिविल लाइन्स डिपो के सहायकक्षेत्रीय प्रबन्धक के हवाले कर दिया गया | यही से डिपो का दुर्दिन भी शुरू हो गया |डिपो को पूरी तरह वर्ष 2015 मेतोड़ने पर अमादा हो चुके बिभागीय अधिकारियो के मंसूबे पर तब पानी फिर गया जब लोगो ने इस पर कड़ी आपत्ति करते हुए मुगरा बादशाहपुर बिधायक सीमा द्विवेदी को प्रकरण से अवगत कराया |सूचना पर तत्काल पहुंची बिधायक सीमा द्विवेदी ने प्रबंध निदेशक से वार्तालाप कर लोगो की भावनाओ से अवगत कराते हुए डिपो मे सहायक क्षेत्रीय प्रबन्धक की नियुक्ति करने की अपील कर दी | फिल हाल डिपो तो बच गया और सहायक प्रबन्धक की नियुक्ति भी हो गयी लेकिन डिपो की बसो के बेड़े मे महज एक दर्जन बसे रह गयी है |जहां तक यात्री सुबिधा का सम्बन्ध है डिपो का कार्यालय तथा यात्री प्रतिक्षालय पूरी तरह जर्जर हो चुका है | यात्री प्रतिक्षालय की छत के उखड़े प्लास्टर जहां टूट टूट कर गिर बैठे यात्रियो को घायल कक रहा है वही फटी छत भीषण दुर्घटना को आमंत्रण दे रहा है |डिपो परिसर कबाड़ घर बन प्राइवेट वाहनो का अड्डा बन चुका है | इस सम्बन्ध मे सहायक क्षेत्रीय प्रबन्धक ने बताया कि कबाड़ हो चुकी बाहरी गाड़िया मुगरा थाने द्वारा डिपो परिसर मे रखी गयी है | जिसे हटवाने के लिये कहा गया है जहा तक यात्री सुबिधा की बात है इसके लिए क्षेत्रीय प्रबन्धक को पत्र लिखा गया है अगर जरूरत पड़ी तो मुख्यालय को पत्र लिखा जायेगा |फिलहाल बादशाहपुर डिपो बिभागीय अधिकारियो की की उदाशीनता एवं जन प्रतिनिधियो की लापरवाही का खामियाजा भुगत अपनी दुर्दशा पर बिधवा बिलाप कर रहा है |जिसकी सुधि न बिभाग ले रहा और न ही जन प्रतिनिधि ले रहे है |
( वृजेश कुमार पाण्डेय )
फोटो ऊपर है
2 --- नकब लगाकर चोरों ने आभूषण व नकदी उड़ाए
मुंगराबादशाहपुर । स्थानीय थानान्तर्गत छनेहता गांव में रविवार की रात चोरों ने कच्चे मकान में नकब लगाकर चार हजार नकदी समेत साठ हजार के आभूषण पर हाथ साफ कर दिया। भुक्तभोगी ने पुलिस को सूचना दे दिया है।
उक्त गांव निवासी शैलेंद्र कुमार बिंद के घर में चोरों ने मकान के पीछे नकब लगा दिया और अंदर घुस गए। घर में रखे बक्से अटैची सिवान में उठा ले गए जिसमें रखे गए चार रूपये नकदी व आभूषण दो जोड़ी पायल,एक जोड़ी झुमका, दो मंगलसूत्र आदि उठा ले गए। भुक्तभोगी परिवार को घटना की जानकारी प्रातः जागने के बाद हुई। भुक्तभोगी की सूचना पर पुलिस घटना की जांच में जुटी हुई है।
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