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शुक्रवार, 4 अगस्त 2017

पूर्व मंत्री व विधायकों के मामले में अभियोजन को अंतिम अवसर


3 वर्ष पूर्व मुकदमा वापस लेने का हुआ था शासनादेश

*पारसनाथ ,ललई व जगदीश आदि पर कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन के दौरान पथराव व कार्य में बाधा का आरोप*
जौनपुर -कलेक्ट्रेट में 2009 में सपा नेताओं द्वारा धरना प्रदर्शन के दौरान पुलिस पार्टी पर पथराव व कार्य में बाधा के मामले में शासनादेश के 3 वर्ष बाद भी मुकदमा वापस नहीं हुआ। कोर्ट ने अभियोजन पक्ष को अपना पक्ष रखने के लिए अंतिम अवसर दिया है।मामले में तीन विधायक व पूर्व मंत्री पारसनाथ यादव, ललई यादव, जगदीश सोनकर समेत 31 नामजद व 300 अज्ञात आरोपी हैं ।
विदित हो कि तत्कालीन थानाध्यक्ष लाइन बाजार रामजतन वरुण ने थाना लाइन बाजार में प्राथमिकी दर्ज कराया था कि 11 सितंबर 2009 को 12:30 बजे दिन में समाजवादी पार्टी का धरना प्रदर्शन कलेक्ट्रेट में चल रहा था जिसमें पारसनाथ यादव, जगदीश सोनकर,शैलेंद्र यादव, ज्वाला प्रसाद, लाल बहादुर, लल्लन यादव,श्रद्धा यादव आदि मौजूद थे। करीब 1:40 बजे दिन अचानक पारसनाथ यादव के नेतृत्व में सपा कार्यकर्ता आक्रोशित हो उठे और शासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए बांस बल्ली तोड़ने लगे । गालियां व धमकी देते हुए पुलिस पर पथराव व सरकारी गाड़ी क्षतिग्रस्त कर दिए। सरकारी संपत्ति को क्षति एवं सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाये। कोर्ट में चार्ज शीट आई ।30 अक्टूबर 2014 को विशेष सचिव, उत्तर प्रदेश शासन ने धारा 321 सीआरपीसी के तहत मुकदमा वापस देने का शासनादेश जिलाधिकारी को भेजा डीएम के निर्देश पर तत्कालीन अभियोजन अधिकारी लक्ष्मीकांत मिश्र ने 4 दिसंबर 2014 को शासनादेश का हवाला देते हुए मुकदमा वापस लेने संबंधी प्रार्थना पत्र देकर किया तब से पत्रावली उसी प्रार्थना पत्र की सुनवाई में चल रही है।

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