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गुरुवार, 3 नवंबर 2016

रामसेवक विश्वकर्मा

प्रतापगढ़

प्यार की दी सजा, गला घोंटकर मारा मनीषा को

जिन लोगों ने पाला पोसा उन्होंने ही सिर्फ प्यार करने और अपनी पसंद के युवक से शादी करने के चलते मनीषा की हत्या कर दी। अपनी लाडली का गला घोटते परिजनों को जरा भी दया नहीं आई। बुधवार को मनीषा की लाश घर में मिलने के बाद यही अल्फाज हर एक दोहरा रहा है।

मनीषा का पिता विनोद उड़ैयाडीह के पास स्थित जनता इंटर कालेज का प्रधानाचार्य है। उसके दो लड़कियां थीं। जिनमें बड़ी की शादी हो चुकी है। मनीषा छोटी थी। एक बेटा सत्यम है जो मनीषा से छोटा है। ग्रामीणों का कहना था कि विनोद उग्र स्वभाव का है। विनोद का भाई रवीन्द्र गांव में ही अलग रहता है। मनीषा ने सितंबर में जब सौरभ के साथ शादी की, तब से विनोद खासा नाराज था। उसे बेटी द्वारा लिया गया निर्णय किसी भी तरह कबूल नहीं था।

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तो बच जाती मनीषा की जान :

विनोद बहाने से मनीषा को लेकर प्रतापगढ़ आ गया था। पति सौरभ पुत्र भास्कर पाण्डेय ने जब गुहार लगाई तो पुलिस ने विनोद को मनीषा के साथ थाने बुला लिया था। थाने पर हुई पंचायत में मनीषा किसी भी सूरत में पिता के साथ नहीं जाना चाहती थी। वह बारबार पति के साथ जाने की बात कह रही थी पर विनोद ने तमाम लोगों से पुलिस पर दबाव डलवा दिया। सौरभ ने कोर्ट मैरिज का भी हवाला दिया पर कोई मतलब नहीं निकला। अंतत: पुलिस ने बालिग होने के दस्तावेज न होने का बहाना बना कर मनीषा को पिता के साथ भेज दिया। इस पंचायत के अगले दिन दीपावली पड़ गई। परिजनों ने मौका देख कर मनीषा की हत्या कर दी। अगर पुलिस दबाव में न आती तो कोर्ट मैरिज के कागजात और मनीषा के बयान के आधार पर उसे सौरभ के हवाले कर देती तो शायद मनीषा की जान बच जाती। इतना ही नहीं, सौरभ की तहरीर पर दो नवंबर को पुलिस ने विनोद व अन्य के खिलाफ मामला तो दर्ज कर लिया पर इसके बाद भी तुरंत कोई कार्रवाई नहीं की। अंतत: बुधवार को मनीषा की लाश मिलने की सूचना मिलने पर ही पुलिस गांव गई। पुलिस की इस लापरवाही की कीमत मनीषा को जान देकर चुकानी पड़ी।

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हाईकोर्ट में भी लगाई थी गुहार :

सौरभ ने अपनी पत्नी मनीषा को बचाने के लिए पुरजोर कोशिश की थी। कोर्ट मैरिज करने के बाद जब विनोद मनीषा को लेकर प्रतापगढ़ आ गया और वादे के मुताबिक एक हफ्ते में उसे वापस सौरभ के पास नहीं भेजा तो सौरभ ने तुरंत हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच से गुहार लगाई थी। इस मामले में मनीषा की गवाही होनी थी पर मनीषा निर्धारित समय पर कोर्ट में पेश नहीं की गई। सौरभ ने दो नवंबर को इसकी जानकारी पट्टी पुलिस को दी। साथ ही अपनी व मनीषा की जान को खतरा बताया। पुलिस ने इस तहरीर के आधार पर विनोद, उसके भाई व एक अन्य के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज कर लिया। सौरभ के यह सारे प्रयत्न बेकार गए। नकारा तंत्र उसकी गुहार सुनने और समय से उस पर कार्रवाई करने में पूरी तरह नाकाम रहा। उसकी प्रेम की बगिया एक झटके में उजड़ गई।

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काशी यात्रा पर गए परिजन :

ऐसा लगता है कि मनीषा की हत्या मंगलवार को ही कर दी गई थी। परिवार वालों ने मंगलवार रात को ही गांव वालों को बता दिया था कि वह काशी यात्रा पर जा रहे हैं। सुबह परिवार तो नदारद मिला, घर में मनीषा की लाश पड़ी मिली। पुलिस अब पता लगा रही है कि हत्याकर परिवार वाले कहां गए।

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