ट्रेन हादसे में बाल-बाल बचा प्रतापगढ़ का परिवार
दीवानगंज, कंधई थाना क्षेत्र के बिबियाकरनपुर गांव का एक परिवार भी इंदौर पटना एक्सप्रेस से आ रहा था। संयोग से वह बाल-बाल बच गया।
गांव निवासी राकेश श्रीवास्तव अपनी पत्नी ज्योत्सना, बेटे डा. हिमांशु और बेटी तृषा को लेकर एक सप्ताह पूर्व इंदौर अपने भाई की लड़की की शादी में गए थे। 16 नवंबर को शादी थी। वहां से शनिवार को इंदौर-पटना एक्सप्रेस से वह परिवार के साथ कोच संख्या एस-6 में बैठकर वापस आ रहे थे। रविवार भोर लगभग तीन बजकर 10 मिनट पर ट्रेन पटरी से उतर गई। जिस कोच में यह परिवार सफर कर रहा था वह भी उतर गया। ईश्वर का करिश्मा ही कहेंगे कि किसी को खरोंच तक नहीं आई।
उन्होंने बताया कि उस दौरान वहां सभी अपनों को ही ढ़ूंढ रहे थे। मंजर हाहाकार में तब्दील था। कड़कड़ाहट के साथ ट्रेन रुक गई थी। आंख खुलने पर बाहर देखा तो बोगियां कुछ टेढ़ी हो गईं थीं। कुछ जमीन छू रही थीं। वहां से वह सामान लेकर परिवार के साथ झांसी कानपुर हाइवे तक पैदल आए और वहां से मैजिक लेकर 70 किमी दूर कानपुर पहुंचे। वहां से बस से प्रतापगढ़ आ गए।
हादसे पर जताया दुख दीवानगंज, कानपुर के पास हुए ट्रेन हादसे में मारे गए लोगों की आत्मा की शांति के लिए बेलखरनाथ नाथ धाम रामलीला समिति ने दुख जताया व मृतकों की शांति के लिए भगवान से प्रार्थना की। संस्थापक कृष्णकांत मिश्रा, अनिरुद्ध नारायण तिवारी, गौरव सिंह, नारेंद्र प्रसाद ओझा, अवधेश तिवारी, जय प्रकाश मिश्रा, संतोष सरोज, सुभाष सिंह आदि मौजूद रहे।

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