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शुक्रवार, 11 नवंबर 2016

रामसेवक विश्वकर्मा

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प्रतापगढ

रुपये जमा करने व बदलने को बैंकों में उमड़ा हुजूम

  पांच सौ और एक हजार रुपये का नोट बदलने के लिए सुबह से ही बैंकों और डाकघरों में लाइन लग गई थी। प्रधान डाकघर में तो दिन भर लेन-देन हुआ, लेकिन ग्रामीण इलाकों के डाकघरों में असुविधा हुई।

मंगलवार की रात केंद्र सरकार द्वारा अचानक पांच सौ और एक हजार रुपये का नोट बंद किए जाने के बाद से उसे बदलने के लिए लोग बेताब हो रहे थे। गुरुवार को सुबह लगभग आठ बजे से ही बैंकों में लाइन लग गई थी। शहर में स्थित प्रधान डाकघर समेत तीस बैंक शाखाओं में वितरण का कार्य किया जाना था। हर कोई बैंकों के खुलने का इंतजार कर रहा था। इक्का-दुक्का बैंक सुबह नौ बजे खुले। अधिकांश बैंकों ने सुबह दस बजे ही शटर खोले। नोट बदलने के लिए लोगों को एक फार्म भरना पड़ा, फार्म में संबंधित व्यक्ति को पहचान पत्र का विवरण और नोटों की संख्या दर्ज करना पड़ा। ज्यादातर लोग नोट बदलने आए थे। इसे लेकर लोगों में आपाधापी दिखी। लाइन से हट कर जो काउंटर पर पहुंच जा रहा था, उससे नोक-झोंक होती रही। हर बैंक पर पुलिस कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई थी। वह भी उपभोक्ताओं की लाइन लगवाने में लगे रहे। प्रधान डाकघर में भी सुबह से लाइन लग गई थी। ग्रामीण इलाकों में नोट बदलने को लोग सुबह आठ बजे से ही कतारबद्ध हो गए थे। कुंडा, पट्टी आदि इलाकों में बैंक व डाकघर भी सुबह आठ बजे से ही खुल गए थे। रानीगंज व लालगंज तहसीलों में अधिकांश बैंक शाखाएं दस बजे खुलीं।



नोट न होने से निराश हुए लोग : ग्रामीण इलाकों में नोट बदलने का काम काफी देर बाद शुरू किया जा सका। अधिकांश स्थानों पर दोपहर 12 बजे के बाद नोट बदलने का काम शुरू हुआ। इसमें भी सिर्फ सौ सौ के नोट दिए गए। कई बैंक शाखाओं में तो दो बजे वितरण शुरू हुआ। यह काम चार बजे ठप कर दिया गया। बैंक प्रबंधकों ने इसके पीछे अपने पास वैध करेंसी का अभाव का कारण बताया।


नया नोट देख याद आया बचपन :

 रिजर्व बैंक आफ इंडिया द्वारा जारी किए गए दो हजार के नोट को देखकर लोगों को अपना बचपन याद आ गया। लोगों का कहना था कि बचपन में चूरन के साथ जो नकली नोट मिला करता था, ठीक उसी तरह का यह नया नोट नजर आ रहा है। लाल रंग का दो हजार का नया नोट आकार व रंगों के लिहाज से किसी जमाने में बिकने वाले नकली नोट जैसा दिखा। नया नोट देखने व नोट के साथ लोग सेल्फी लेना नहीं भूले। नोट के साथ फोटो खींचकर व्हाट्सएप पर भेजने से नहीं चूके। बैंक आफ बड़ौदा में पहला नया नोट शहर के अचलपुर निवासी मो.आलम कैफी को मिला।

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एक हजार से छोटी दो हजार की नोट

 देश के इतिहास में पहली बार दो हजार का नोट जारी किया गया है। इसे देखने के लिए लोगों में काफी उत्सुकता रही। बताया यह जा रहा था कि नोट काफी बड़े आकार का है पर वास्तव में यह नोट छोटी निकली। अब तक प्रचलित एक हजार की नोट के मुकाबले यह नोट लंबाई व चौड़ाई दोनो में छोटी है।

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