लखनऊ गोंडा में एक शौहर ने कोर्ट में ही बीवी को तलाक तलाक तलाक कहकर एक झटके में रिश्ता तोड़कर हेठी दिखा दी तो फैजाबाद में एक शौहर ने कोर्ट से दरख्वास्त कर तलाक मांगा। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुस्लिम बहनों की पीड़ा पर दिए गए बयान और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के फैसले के बाद बदलाव के यह दो रूप सोमवार को देखने को मिले।
गोंडा। दीवानी परिसर स्थित परिवार न्यायालय में गुजारा भत्ते से जुड़े मामले की पेशी के दौरान सोमवार को तीन तलाक का मामला सामने आया है। अदालत में शौहर ने अपनी बीवी को तलाक दिया और शपथ पत्र दाखिल कर रफूचक्कर हो लिया। वाकये के बाद महिला बदहवास हो गई। डेढ़ साल की बच्ची को ताकते हुए उसके आंसू थम नहीं रहे थे।
रुकैया खातून का निकाह 8 नवंबर, 2014 को महफूज अहमद पुत्र महमूद अहमद निवासी पटेलनगर के साथ हुआ था। निकाह के एक माह बाद ही दहेज में बाइक, सोने की चेन तथा नकदी आदि न मिलने के कारण ससुराल में रुकैया का उत्पीडऩ शुरू हो गया। रुकैया की मानें तो उसका खाना-पानी बंद कर दिया गया और मारपीट भी अक्सर की जाती। वह पांच माह की गर्भवती थी तो उसे ससुराल वालों ने घर से निकाल दिया। इस मामले में 10 जून, 2015 को पति समेत छह के खिलाफ दहेज उत्पीडऩ का मुकदमा दर्ज कराया। यही नहीं, प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय में गुजारा भत्ता की अर्जी दी। सोमवार को इस मामले की पेशी थी। दोनों पक्ष अदालत पहुंच गए। वहां पर महफूज ने अदालत में शपथ पत्र देकर अपनी बीवी को तलाक दे दिया।
मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने सास, ससुर व अन्य को जमानत दे दी थी। पति महफूज को 30 जनवरी, 20 फरवरी, 18 मार्च व 10 अप्रैल को अंतरिम जमानत पर रिहा किया गया। 14 अप्रैल तक जब रुकैया खातून को ससुरालीजन नहीं ले गए तो जमानत खारिज हो गई। इसके बाद जिला जज साधना रानी ठाकुर ने रुकैया के पति व ससुर को समझा-बुझाकर वचन पत्र लिया, जिसमें कहा गया था कि वे अब रुकैया को अपने पास रखेंगे। इसी आधार पर जिला जज ने 28 अप्रैल तक महफूज को अंतरिम जमानत पर रिहा कर दिया था।
*मेरी जिंदगी बर्बाद*
'मेरी जिंदगी बर्बाद हो गई है। यह कैसा हो सकता है। मेरी डेढ़ साल की बेटी है। अब मैं उसे लेकर कहां जाऊं। उसकी गुजर-बसर कैसे करूं। मुझे न्याय चाहिए।
- रुकैया खातून, पीडि़त महिला
'पीडि़त की जिंदगी बर्बाद करने वाले के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। रुकैया को हर संभव कानूनी मदद उपलब्ध कराई जाएगी।
- मिर्जा शाहिद बेग, रुकैया के अधिवक्ता
फैजाबाद । सुप्रीम कोर्ट से लेकर पूरे देश में बहस का विषय बने तीन तलाक के मुद्दे का असर आम मुसलमानों पर पडऩे लगा है। एक शौहर ने तीन तलाक कहकर पत्नी से छुटकारा लेने के बजाय अदालत की शरण ली है। पारिवारिक न्यायाधीश विश्वनाथ ने मुकदमा दर्ज कर याची की पत्नी को नोटिस जारी की है। याची मोहम्मद शमीम ने अदालत में दी गïïई तलाक की अर्जी में कहा है कि वह चाहता तो तलाक तलाक तलाक कह कर भी पत्नी से रिश्ते को समाप्त कर सकता था। अदालत के जरिये तलाक लेना न्याय संगत होगा। मोहम्मद शमीम ने अपनी पत्नी पर ही क्रूरता का आरोप लगाया है और अपनी जान को खतरा बताया है। उसका निकाह पहली अगस्त, 2015 को हुआ था। रोजगार के सिलसिले में वह 31 अगस्त, 2015 को खाड़ी देश चला गया। स्वदेश वापस आने के बाद ही मियां-बीवी में बात-बात पर विवाद व झगड़ा शुरू हो गया।
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