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रविवार, 21 अगस्त 2016

बिपुल सिंह

मीरगंज जौनपुर

सेतु का एप्रोच मार्ग धंसा, भदोही-जौनपुर का टूटा संपर्क 

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* बरुणा नदी पर बने पुल गढ्ढे में तब्दील
* बसों का संचालन ठप

मीरगंज (जौनपुर ) 21 अगस्त 2016स्थानीय क्षेत्र के वरुणा नदी पर बने पंड़ित दीनदयाल सेतु का पहुंच मार्ग धंस गया है। जिससे पिछले दस दिनों से सुरियावां-मीरंगज सड़क पर यातायाता ठप होने से भदोही और जौनपुर जिलों के बीच संपर्क टूट गया है। इस सेतु का निर्माण तत्कालीन भाजपा सरकार में लोक निर्माण मंत्री पंड़ित कलराज मिश्र ने कराया था।
            लेकिन बरसात की वजह से पहुंच मार्ग ध्वस्त होने से पूरा यातायात बाधित है। दोनों जिलों की जनता परेशान है। बसों और चार पहिए का संचालन ठप है। सेतु में एक दर्जन से अधिक जानलेवा गड्ढे बन गए हैं। सेतु पर पैदल गुजरना भी मुश्किल हो चला है लेकिन भदोही और जौनपुर जिला प्रशासन की नींद नहीं टूट रही है। शायद किसी बड़ी दुर्घटना का इतंजार कर रहे है। सबसे दुःखद बात यह है कि 15 साल बाद भी अभी तक इस पुल का लोकार्पण नहीं हो पाया। जबकि प्रदेश में बार-बार सपा और बसपा की सरकारें आयीं लेकिन सेतु की दशा और दिशा नहीं बदली। बारिश के हर मौसम की यहां के लोगों की यहीं पीड़ा है।
          वरुणा नदी पर बने इस सेतु की हालत बेहद खस्ता हो चली है। पुल के पास सड़क पर इतने गहरे और जानलेवा गड्ढे बन गए हैं जिसे देख कर उधर से गुजरने वालों की रुह कांप जाती है। बसों और चार पहिया वाहनों का आवागमन ठप हो गया है। बाइक सवार किसी तरह जान जोखिम में डाल कर यात्रा कर रहे हैं क्योंकि इस सेतु से संपर्क टूटने से वाराणसी और विंध्यधाम के लिए संचालित तीन बसों का आवागमन ठप हो गया है। यह मार्ग बेहद चालू है लेकिन इस तरफ किसी सांसद, विधायक और सरकार का ध्यान नहीं गया। पहुंच मार्ग पर तकरीबन से 20 से अधिक गहरे गड्ढे़ बन गए हैं जिनकी गहराई दस से 15 फीट और चैड़ाई तकरीबन दो से तीन मीटर है। अगर जरा सी सावधानी हटी तो मौत निश्चित है। सेतु का बैकवाल पूरी तरह खाली है। सड़क टूटने से बैकवाल भी बैठ गया है। गंजेड़ियों ने पुल की रेलिंग उखाड़ कर नशे में स्वाहा कर दिया है। सड़क की हालत बेहद खस्ता है।
        सुरियावां से इस पुल तक जोड़ने वाली सड़क कितनी जर्जर और खराब है इसकी कल्पना लिखने से नहीं स्वयं उस पर से गुजर कर की जा सकती है। लेकिन इस समस्या की ओर किसी का ध्यान नहीं है। अभिया वन के निवासी अनिल सिंह का कहना है कि सेतु जानलेवा हो गया है। लोग जानजोखिम में डाल कर गुजर रहे हैं कभी भी बड़ा हादसा हो सकता हैं। पूरेदरियाव निवासी रवि शंकर दूबे का अरोप है कि इस सेतु का दुर्भाग्य है भजपा सरकार में इसका निर्माण करा दिया गया लेकिन एप्रोच मार्ग के निर्माण में मानक का ध्यान नहीं दिया गया। माता शंकर उपाध्याय का कहना है की सारा पैसा हजम कर लिया गया जिससे आज इस सेतु की यह हालत है भदोही और जौनपुर का संपर्क टूट गया है। इस सेतु का निर्माण भाजपा सरकार में कराया गया था लेकिन बादकी सरकारें उसे सहेज तक नहीं पायी। वरुणा बरसात की वजह से उफनाई हैं लेकिन पुल का संपर्क मार्ग टूटने से लोग जानजोखिम में डाल कर दुपहिया से जा रहे हैं जबकि बसें और चार पहिया वाहन बंद हैं। कारो बनकट निवासी पप्पू सिंह ने बताया कि भदोही और जौनपुर जिलों का संबंधित विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है किसी तरह हम ईंट भट्ठे की ईंटों का डाल कर इन गड्ढ़ों को भरते हैं लेकिन आज तक इस सड़क का निर्माण नहीं कराया गया। हर बरसात में सेतु का मार्ग ध्वस्त होने से आवागमन बाधित हो जाता है। अभिया वन के बंटेश सिंह ने बताया कि आज तक इस पुल का लोकार्पण नहीं हो सका है। इस पुल और यहां की जनता का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है। मुकेश दूबे, पोटर दूबे और प्रेमचंद्र वर्मा का दावा है कि सेतु टूटने से आवागमन की बड़ी समस्या हो गयी है। बरसात की वजह और दिक्कत हो रही है वहीं मिर्जापुर और विंध्याचल के लिए जानेवाली बसाे का संचालन ठप होने से आम लोगों को काफी दिक्कत उठानी पड़ रही है। लोगों का यह भी दावा है कि कई बार सपा और बसपा की सरकारें बनने के बाद भी पंड़ित दीनदयाल सेतु का सरकारी तौर पर लोकार्पण नहीं हुआ और न हीं एप्रोच मार्ग पर ध्यान दिया गया। यहां कभी भी जानलेवा हादसा होने के बाद भदोही और जौनपुर जिला प्रशासन की नींद खुलेगी। चुनावी मौसम की आहट दिखने लगी है दिवालों पर रंग बिरंगे इश्तहार नजर आने लगे हैं। लेकिन इस सेतु की दुर्दशा पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। जबकि चुनवों में वोट मांगने और विकास का सब्जबाग दिखाने में सभी राजनैतिक दल आगे होंगे। सबसे बड़ी बात समाजवादी सरकार का विकास का दावा खोखला साबित हो रहा है। लोगों का आरोप है कि विधायक जी का ध्यान इस सेतु और सुरियावां से अभिया मार्ग पर कभी नहीं गया। यहां की जनता के लिए सबसे अधिक पीड़ा की बात है। विकास और उसके दर्द को लेकर जनता अपने भाग्य पर आंसू बहा रही है जाने कब पंड़ित दीनदयाल सेतु की दशा लौटेगी।

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