जानलेवा बन गया हाइवे
वाराणसी-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग जानलेवा बन गया है। जगह-जगह खतरनाक गड्ढे और धूल लोगों के सफर में बाधा पैदा कर रहे हैं। हद तो यह है कि खतरा भांपते हुए लोग गांव के रास्ते यात्रा करने को मजबूर हैं। यात्री और स्थानीय लोग कई सांस की गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। उधर, विभागीय अधिकारी लापरवाह हैं तो प्रशासन भी सोया हुआ है। जबकि क्षेत्रीय जनप्रनिधियों की उदासीनता लोगों में खासी नाराजगी पैदा कर रही है।
राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 56 की दशा वाराणसी से लेकर सुल्तानपुर जिले की सीमा तक बेहद खराब हो चुकी है।
इस मार्ग पर निजी साधनों से प्रतिदिन यात्रा करने वाले लोग गांवों से होकर गुजरने वाले रास्तों से यात्रा करने के विवश हो गए हैं। सड़क पर बने बड़े बड़े गड्ढे जानलेवा बन गए हैं। मंगलवार को बदलापुर थाने के ठीक साने रोड पर बने गड्ढे में बाइक असंतुलित हुई तो पीछे बैठी महिला के हाथ से उसका चार साल का बेटा छूट गया और सड़क पर गिर पड़ा।
जबतक महिला अपने बेटे को उठा पाती तबतक पीछे से आ रहा ट्रैक्टर का पहिया बच्चे के ऊपर से गुजर गया। शनिवार को शंभूगंज के पास हाईवे पर बने गड्ढे में गिरकर दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए थे। सड़क पर बने गड्ढों को भरने के लिएकहीं मिट्टी तो कहीं राबिस डाल कर विभाग ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है। जिसका नतीजा कि अब पूरे दिन हाईवे पर धूल और गुबार उड़ रहा है। खास तौर से दो पहिया या खुले वाहनों से सफर करने वाले लोग सांस की बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। हृदय रोग विशेषज्ञ डा. वीएस उपाध्याय कहते हैं कि धूल और गुबार के बीच नियमित सफर करने वाले लोगों को दमा और फेफड़े की बीमारी हो सकती है। लोगों को मास्क लगाकर चलना चाहिए।
उधर लोगों का गुस्सा प्रशासन पर भ्ाी है। उनका कहना है कि प्रशाासन की लापरवाही का नतीजा है कि विभाग चुप बैठा है। अब तक तो सड़के बन जानी चाहिए थी। लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हाे सका। जबकि जनप्रतिनिधियों की उदासीनता भी भ्ाारी पड़ रही है। लोगों का कहना है कि ऐसे में अब जनप्रतिनिधि को अपनी जिम्मेदारी समझ कर आगे आ जाना चाहिए। ताकि लोगों को इस जानलेवा हाइवे से छुटकारा मिले और दूर की यात्रा करने वाले आसानी से वाहनों के जरिए अपने गंतव्यों को आ जा सकें।
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