बिपुल सिंह
शिक्षा विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों मे नही हो रहा सुधार
खेतासराय / जौनपुर- जौनपुर उ0 प्र0 में शिक्षा का व्यवसायीकरण इस कदर है कि यहाँ भ्रष्ट अधिकारी आँखे बंद कर धड़ल्ले से आवासी मकानों,सहित छप्पर टीन सेट छोटे छोटे कमरों वाले घरों को स्कूल की मान्यता दे दी जाती है ।
अब वही मानो तो अफसरों को बरसात के दिनों में मई ,जून की भीषण गर्मी जैसा पसीना आ रहा है ।
इनको पसीना आने की मुख्य वजह सिर्फ हाईकोर्ट में दायर सतीश चन्द्र यादव की जनहित याचिका है।
हाईकोर्ट में दायर 31405 नंबर की जनहित याचिका शिक्षा विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों की नींद उड़ा दी है ।
सूत्रों के मुताबिक़ शाहगंज शिक्षा क्षेत्र के अधिकारी अपनी नौकरी बचाने की जुगत में पूरी तन्मयता से लग गए है वे नहीं चाहते की मेरे किये गये कर्मो का मुझे कोर्ट दंड दे ।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक़ शिक्षा विभाग के अधिकारी द्वारा खेतासराय प्राथमिक विद्यालय (सोंधी) में मान्यता प्राप्त विद्यालयों के प्रबंधकों व उनके शिक्षकों की एक मीटिंग ली गयी थी।
जिसमे लोगों को कहा गया था अब आप लोगों को एक सप्ताह के अन्दर मानक के हिसाब से अपने विद्यालय को दुरूस्त करना होगा । 180 वर्ग फीट से कमरे व पुस्तकालय ,शौचालय अग्निशमन यन्त्र इत्यादि को मानक के अनुरूप पूरा करिए
शाहगंज के अधिकारी इसलिए परेशान नजर आ रहे है कि सबसे ज्यादा इन्ही के क्षेत्र में मानक विहीन विद्यालयों को मान्यता दी गयी है ।
अधिकारी खेतासराय में लोगों की मीटिंग टाट पट्टी पर बैठाकर ले रहे थे।
इसी दौरान एक भ्रष्टाचार के खिलाफ रहने वाला व्यक्ति अपनी ठेठ भाषा में तपाक से बोला ...
हे साहेब इ मीटिंग भूई टाट पट्टियें पे होई या हमने के बईठे खातिर कुर्सियों मिली ।
इस पर अधिकारी आनन फानन में सामने स्थित अरिहंत कालेज में मीटिंग को ट्रांसफर कर पुनःमीटिंग शुरू किये
मीटिंग चलही रहा था तभी पुनः उक्त शख्स द्वारा फिर आवाज लगायी गयी कि खाली मीटिगै होई की चाहियो पानी आई इस पर अधिकारियों द्वारा कोई प्रतिक्रया न होने पर शख्स ने खुद अपने मोबाइल से कही फ़ोन कर लगभग 100 सील बंद बोतल पानी व बिस्किट को 10 मिनट के अन्दर मगवाया तो मीटिंग में उपस्थित लोग खुश हो गए वही अधिकारी सिर झुका लिए ।
ये हाल है भ्रष्ट अफसरों का जो मानक विहीन विद्यालयों की मान्यता देने के बाद अब उन्ही विद्यालयों से कह रहे है कि अब मानक पूरा करना पड़ेगा । इनसे कौन पूछे साहब मान्यता तो आप ही ने दिया है क्या बिना मानक देखे मान्यता दे दिया था ?

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