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रविवार, 11 सितंबर 2016

तीखी आवाज़

बाहुबली बृजेश के परिवार ने भी छोड़ा बसपा का दामन
वाराणसी. माफिया से माननीय बनने का सफर तय करने वाले बाहुबली एमएलसी बृजेश सिंह के परिवार ने भी बसपा को बीच मझधार में छोडऩे का फैसला कर लिया है। बाहुबली बृजेश सिंह अब तक अपनी पत्नी पूर्व एमएलसी अन्नपूर्णा सिंह को बसपा के टिकट पर चंदौली से लड़ाने की तैयारी में थे लेकिन दयाशंकर सिंह-मायावती सिंह के विवाद के बाद बदले हालात में बाहुबली परिवार को अपना पैंतरा बदलना पड़ा है। बृजेश को भलीभांति मालूम है कि दयाशंकर सिंह व बसपा बॉस मायावती प्रकरण के बाद से क्षत्रियों व दलितों में एक लकीर सी खींच गई है। ऐसे में यदि बसपा के टिकट पर पत्नी को चुनाव मैदान में उतारते हैं तो अपनी जाति के लोगों से नाराजगी बढ़ सकती है और हार का सामना करना पड़ सकता है। 
बदले हालात में बृजेश सिंह नेे जो दांव खेला है उससे आगामी विधानसभा चुनाव में बीजेपी को फायदा मिलना तय है। बृजेश सिंह की पत्नी अन्नपूर्णा सिंह जो बसपा के टिकट पर एमएलसी रह चुकी हैं, को चंदौली से ही प्रगतिशील मानव समाज पार्टी के टिकट पर विधानसभा चुनाव के मैदान में उतारने की तैयारी है। गौरतलब है कि इसी पार्टी के टिकट पर बृजेश सिंह ने वर्ष 2012 में सपा के मनोज सिंह ने हराया था। बृजेश सिंह के पारिवारिक मित्रों की माने तो प्रगतिशील मानव समाज पार्टी के मुखिया प्रेमचंद बिंद से बीते दिनों जेल में बृजेश सिंह की लंबी गुफ्तगू हुई थी। 
बाहुबली बृजेश सिंह ने प्रगतिशील मानव समाज पार्टी के मुखिया प्रेमचंद बिंद को भाजपा के साथ गठबंधन के लिए राजी कर लिया है। बाहुबली के इस दांव से जहां विरोधियों में खलबली है वहीं समर्थकों में खुशी है क्योंकि भाजपा के साथ प्रगतिशील मानव समाज पार्टी का गठबंधन होने से अन्नपूर्णा सिंह की राह आसान हो जाएगी। बीजेपी के परंपरागत वोट तो झोली में गिरेंगे ही, साथ ही बिंद समाज का वोट भी मिलेगा। सूत्रों की माने तो गठबंधन के बाद पार्टी चंदौली, भदोही व मिर्जापुर की तीन से चार सीट ही मांगेगी जहां पर बिंद वोट बैंक खासा प्रभाव डालते हैं। 
भाजपा भी बाहुबली परिवार के इस पैंतरे से खुश है क्योंकि सुशील पहले ही भाजपा में शामिल हैं, बीते विधान परिषद चुनाव में बृजेश को वाकओवर देकर बीजेपी पहले ही इस बाहुबली को अपने खेमे में अप्रत्यक्ष रूप से शामिल कर चुकी है। बृजेश की कोशिश से यदि प्रमासपा का गठबंधन होता है तो बीजेपी के लिए यह प्लस प्वाइंट होगा साथ ही बृजेश के लिए भविष्य में आधिकारिक रूप से बीजेपी के दरवाजे खुलेंगे। वैसे भी बृजेश सिंह के अस्सी के दशक से लेकर अब तक के कई करीबी भगवा झंडा ही उठाकर अपनी राजनीतिक पारी खेल रहे हैं।

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