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सोमवार, 5 सितंबर 2016

तीखी आवाज़

 विपक्ष को मिला बड़ा मुद्दा

अरविंद उपाध्याय

 प्रदेश के एक बड़े अधिकारी का बयान अखिलेश  सरकार के लिए गले की फाँस बन गया है।बात छोटी नहीं है क्योंकि कही गयी बात ने सरकार की समूची कार्य संस्कृति को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है।साथ ही यह टिप्पणी प्रदेश में जिलाधिकारियों द्वारा विभिन्न मदों में खर्च किये जाने वाली हजारों करोड़ रुपये की मोटी रकम में घपलेबाजी के गम्भीर इशारे करती है ।विपक्षी दलों ने इसे बतौर मुद्दा लपक लिया है ।
  प्रदेश शासन में राष्ट्रीय एकीकरण विभाग के सचिव अशोक कुमार ने बस्ती जनपद  के दौरे के दौरान पत्रकारों से कह दिया कि सपा सरकार में डीएम बनने के लिए 70 लाख रुपये लगते हैं ।यह रकम होती तो वे भी डीएम बन गए होते ।जो अधिकारी नहीं देता उसे मुख्यालय में ड्यूटी बजानी पड़ती है ।बस्ती के नोडल अधिकारी के तौर पर तीन दिन का दौरा कर रहे अशोक कुमार ने हालाँकि अपनी टिप्पणी के तुरंत बाद इसे अनौपचारिक बातचीतद कह कर सफाई देने की कोशिश की लेकिन तब तक उसे पंख लग चुके थे।खबर है कि उन्हें दौरे के दौरान ही अगले दिन निलम्बन की सूचना मिल गई ।
  इस तरह के आरोप आये दिन सियासी फिज़ा में तैरते रहते हैं लेकिन एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा उस पर मुहर लगा देना काफी मायने रखता है ।चुनाव बेहद नजदीक है, सियासी हमले लगातार तेज हो रहे हैं ।ऐसी स्थिति में विपक्षी दलों को मानो एक और हथियार मिल गया है ।

उत्तर प्रदेश में फिर से अपनी पकड़ बनाने के लिए बेचैन कांग्रेस ने इसे अति गम्भीर बात कह कर सार्वजनिक सभाओं में  सपा सरकार पर हमला तेज कर दिया है।'27साल - यू पी बेहाल' का नारा लेकर सड़क पर निकली कांग्रेस की जौनपुर के टाउन हाल मैदान में रविवार की शाम आयोजित जनसभा में इस मुद्दे को तीखी टिप्पणियों के साथ उठाया गया ।
 वैसे उत्तर प्रदेश में अस्थिर सरकारों एवं क्षेत्रीय दलों की सरकारों के दौर में मोटी रिश्वत लेकर मंत्रियों द्वारा  ट्रांसफर और पोस्टिंग करने का खेल अब नई बात नहीं मानी जाती ।वर्तमान समय में भी सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव और शासन प्रमुख अखिलेश यादव की लगातार घुड़कियों के बावजूद अनेक मंत्रियों द्वारा ट्रांसफर और पोस्टिंग के जरिए मोटी उगाही की प्रवृत्ति न छोड़ने की बात जग जाहिर है ।

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