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बुधवार, 14 जून 2017

चौपाल गैर जनपद से घिरा सौतेलेपन का शिकार गॉव नकहरा भीलमदेव














डॉ ए . के. यादव
सिंगरामऊं - - हिंदुस्तान जहां आज दुनिया के विकसित देशों की कतार में खड़े होने की जद्दोजहद में लगा है। उस देश का एक ऐसा गॉव जो आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। वह देश जिसकी आत्मा गॉवों में बसती है, उस देश की नींव आज भी कितनी कमजोर है इसका अंदाजा इस गॉव से लगाया जा सकता है। जनपद  की पश्चिमी सीमा पर बसा गॉव नकहरा भीलमदेव जो राजस्व अभिलेखों में तो जौनपुर जनपद में दर्ज है, परंतु चारो तरफ से प्रतापगढ़ जनपद सीमा से घिरा है।इस गाँव में जाने के लिए बिना प्रतागढ़ की सीमा में घुसे आप नहीं जा सकते वह भी सिर्फ पगडंडियों के सहारे, गॉव में सिर्फ मई-जून में ही शादी होती है। किसी पंडित ने मुहूर्त तो नहीं निकाला, लेकिन साल के 10 महीने यहां शहनाई नहीं बजती। जिनकी शादियां तय हो जाती है वो मई और जून के महीने का इंतजार करते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इस गाँव में सड़क ही नहीं है। मई-जून में खेत खाली होने पर खेतों के बीच से बारात गुजरती है। इस गाँव की मुख्य समस्या सड़क है, गाँव तक पहुंचने के लिए कोई सड़क या चकरोड नहीं है। करीब दो किलोमीटर तक खेतों की मेढ़ों पर चलना होता है, जिससे न वाहन पहुंच पाते हैं, न बैंडबाजा। इतने पिछड़े गाँव में लोग शादियां नहीं करना चाहते। जिन युवक-युवतियों की शादियां हो भी जाती हैं, वो ये सोचते हैं कि उनके रिश्तेदार दोबारा यहां आएंगे कि नहीं। जिला मुख्यालय से करीब 42 किलोमीटर दूर  बदलापुर ब्लॉक के नकहरा भीलमदेव गॉव का हाल बिल्कुल उसके नाम जैसा ही है। बीमारी की हालत में एंबुलेंस तक पहुंचाने के लिए मरीज को खेतों के बीच से चरपाई पर ले जाना पड़ता है। गॉव मे पेयजल का भी अभाव है, शौंचालय कुछ तो बना दिये गये लेकिन उनमें दरवाजा नहीं लग सका जिससे वे निर्रथक साबित हो रहै हैं।   13.24 हेक्टेयर क्षेत्रफल में लगभग 40 घरो मे कुल 400 लोग निवास करते हैं जिसमें लोहार, कहार और ब्राह्मण हैं। राजस्व अभिलेखो में गॉव में कुल 11 चकमार्गों का क्षेत्रफल 242 एअर दर्ज है फिर भी गॉव में पहंचने के लिए पगडंडी ही है। गॉव के पं० शारदा प्रसाद तिवारी बताते हैं, “यहां शादी करने से पहले लोग 10 बार सोचते हैं, न सड़क है न बिजली। अब ऐसे में कौन अपनी बेटी की शादी करना चाहेगा। लड़के तो दूर हमारे यहां तो लड़कियों की शादियां होने में भी दिक्कत होती है।” किसी पंड़ित ने मुहूर्त तो नहीं निकाला लेकिन हमारे यहां शादी-बारात सिर्फ मई-जून में हो सकती हैं क्योंकि तब खेत खाली होते हैं और गाड़ी-घोड़ा गाँव तक पहुंच जाते हैं।राजेन्द्र प्रसाद तिवारी बतातें हैं कि मुख्य मार्ग से गाँव को जोड़ने वाली कोई सड़क नहीं है। ग्रामीणों का कहना है वर्षों पहले हुई चकबंदी के दौरान किसी ने सड़क का ध्यान नहीं दिया, तो सड़क के नाम पर बस मेढ़ ही बची है, कुछ साल पहले तक को आदमी साइकिल पर बैठकर गाँव तक नहीं पहुंच पाता था। गाँव की लड़कियां इन्हीं खेतों से होकर स्कूल जाती हैं और अगर किसी महिला को बच्चा होने वाला हो और उसे रात-बिरात दर्द हो जाए तो खटिया पर ही ले जाना पड़ेगा। एंबुलेंस  2 किलोमीटर दूर सड़क पर खड़ी रहती है। रमाशंकर तिवारी कहते हैं कि गॉव में विद्युतीकरण नही हो सका हम लोग प्रतापगढ़ जनपद की बिजली तीन सौ मीटर केबल लगाकर उपभोग करते हैं।
 बजरंगी व माधव विश्वकर्मा का कहना है, “20 साल के दौरान रास्ते के बारे में ध्यान नहीं दिया गया। गाँव के चारो तरफ खेत ही खेत हैं। खेत की मेड़ से पूरे गाँव के लोग निकलते हैं।” वो आगे बताते हैं “कई बार लोग शादी के लिए भी मना कर देते हैं, अगर कभी मजबूरी में शादी सर्दियों में करनी हो तो पहले खेत वाले से बात कर लेते हैं जिसके खेत से गाड़ी निकाली जा सके,खेत वाले अपना नुकसान सहकर गाड़ी निकालने देते हैं, इसलिए किसी का नुकसान हो उससे अच्छा है खेत खाली होने पर ही शादी करें।” इस गाँवों में रहने वाले लोगों को योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने से उम्मीद जगी हैं। हवलदार व सभाजीत खैरवार कहते हैं, उम्मीद है योगी जी हमारे गाँव के लोगों की भी समस्या समझेंगे,  हम गरीबों का भी भला होगा।“ योगी सरकार ने प्रदेश की सभी सड़कों को 15 जून तक गड्ढा मुक्त करने के आदेश दिए हैं तो कम आबादी वाले गांवों को भी सड़क मार्ग से जोड़ने की कवायद शुरू की है। लगभग सभी ग्रामीण एक स्वर में बोले कि हमारे साथ तहसील व जिला प्रशासन सौतेला व्यवहार कर रहा है, क्यों न हमारा गॉव प्रतापगढ़ जनपद में  सम्मिलित कर दिया जाय, इसके लिए हम अपनी आवाज बुलंद करेंगे। इस बावत ग्राम प्रधान पंकज तिवारी ने बताया कि काफी अर्से से पिछड़ेपन का शिकार रहे इस गॉव को मैं अपने कार्यकाल में पूर्णरूप से विकसित करने का काम कर रहा हूँ, सांसद, विधायक तथा अधिकारियों से बात कर गॉव के समुचित विकास की कार्ययोजना तैयार की जा रही है और भविष्य मे इस गॉव को विकसित गॉव कै रूप मे देखा जायेगा।

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